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‘पैसे के आगे झुका प्रशासन’ का गंभीर आरोप: डीजीपी की नसीहतों को दरकिनार कर शराब ठेकेदार के दबाव में ‘सेटल’ हुआ मारपीट और लूट का मामला? – Madhya Pradesh Voice

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‘पैसे के आगे झुका प्रशासन’ का गंभीर आरोप: डीजीपी की नसीहतों को दरकिनार कर शराब ठेकेदार के दबाव में ‘सेटल’ हुआ मारपीट और लूट का मामला?


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10/10/2025 2:16 AM Total Views: 421338

सीसीटीवी फुटेज जांच की मांग

बैतूल/सारनी। एक ओर मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना पीड़ितों की शिकायतों पर तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई करने की नसीहत प्रदेश के सभी थानों को दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बैतूल जिले के सारनी थाने में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि शराब ठेकेदार के रसूख और पैसे के दबाव में एक शिकायतकर्ता को घंटों थाने में बिठाकर ‘समझौते’ का दबाव बनाया गया और मारपीट व लूट जैसे गंभीर आरोपों को ‘सेटल’ करवा दिया गया, जबकि अनावेदकों को पूरी छूट दे दी गई। यह घटनाक्रम डीजीपी के निर्देशों को सीधे तौर पर धता बताता नजर आ रहा है, और चौक-चौराहों पर “अमीरों के आगे झुकी पुलिस” की चर्चा गरम है।

यह पूरा मामला 4 अक्टूबर का है, जब शोभापुर कॉलोनी निवासी मनोज उपराले ने सारनी थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता मनोज उपराले ने आरोप लगाया था कि शराब ठेकेदार का काम देखने वाले विजय उपराले के छोटे भाई मनोज उपराले, देवेंद्र दुबे और सुनील वर्मा ने शुक्रवार (3 अक्टूबर) को सुबह करीब 9 बजे के आसपास उसके साथ मारपीट, झूमा-झपटी की, 10 हजार रुपये छीन लिए और दारू की एक बोतल के साथ उसका वीडियो बनाकर उसे धारा 34/2 में फंसाने और जान से मारने की धमकी दी।

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शिकायतकर्ता को घंटों थाने में बिठाया, अनावेदकों से समझौता करवाया:

इस गंभीर घटना के बाद, पीड़ित मनोज उपराले, जो शराब ठेकेदार के इन दलालों से परेशान था, ने शनिवार (4 अक्टूबर) को सीधे एसडीओपी मोहन उपराले और फिर सारनी थाने जाकर तीनों के खिलाफ नामजद लिखित शिकायत कर तत्काल कार्रवाई की मांग की। लेकिन आरोप है कि “ईमानदारी से भरी पड़ी” सारनी पुलिस ने शिकायतकर्ता को दोपहर 3 बजे से रात 8:30 बजे तक थाने में बिठाए रखा। इस दौरान, अनावेदकों को भी थाने बुलाया गया और कथित तौर पर शिकायतकर्ता पर समझौते का दबाव बनाकर रात 9 बजे तक मामला ‘रफा-दफा’ करवा दिया गया।

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हमारे प्रतिनिधि ने समझौते से पहले शिकायतकर्ता से बात की थी, जिसकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित होने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय अखबार में भी यह आशंका पहले ही जताई गई थी कि शिकायतकर्ता पर दबाव बनाकर समझौते की पेशकश की जाएगी, और हुआ भी बिल्कुल वैसा ही। इस घटना से अब प्रशासन की जमकर थू-थू हो रही है। लोग खुलकर कह रहे हैं कि अगर यही आवेदन कोई गरीब के खिलाफ होता तो पुलिस बड़े ही ‘ईमानदारी’ से तत्काल कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपाती, लेकिन अमीरों के सामने पुलिस प्रशासन ने भी घुटने टेक दिए।

“पैसों के आगे सब झुकते हैं”: शराब ठेकेदार के भाई का दावा और ‘ऊपर’ तक दबाव की कहानी

मामले को और भी विस्फोटक तब बना दिया जब रविवार को स्थानीय अखबार में मोहन उपराले के वीडियो और शिकायत के आधार पर समाचार प्रकाशित होने के बाद, विश्वसनीय सूत्रों से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। आरोप है कि शराब के काम से जुड़ा दलाल विजय उपराले पाथाखेड़ा की एक चाय की दुकान पर बेखौफ होकर यह शेखी बघार रहा था कि “पैसों के आगे सब झुकते हैं।”

विजय उपराले ने कथित तौर पर डींग हाँकते हुए कहा कि पहले शुक्रवार को पुलिस द्वारा महाराष्ट्र पासिंग वाहन में पकड़ी गई शराब मामले में उसके भाई मनोज पर 34/2 का केस बनने वाला था, लेकिन उसने उसे बचाकर मनीष शिवहरे पर केस बनवा दिया। फिर, मोहन उपराले की शिकायत आवेदन पर छोटे भाई मनोज पर मारपीट सहित 10 हजार रुपये लूट का केस बनने वाला था, तभी उसके कहने पर “ऊपर मंत्री से बैतूल एसपी की ‘पिलाई’ करवाई गई,” जिसके बाद एसपी ने टीआई को मोहन उपराले वाली शिकायत में पक्की एफआईआर दर्ज न करने के आदेश दिए।
चाय की चुस्की मारते हुए विजय ने कथित तौर पर कहा, “पुलिस, एसपी हो या कलेक्टर, सबको अपनी जेब में रखते हैं आज के समय में हम। शराब ठेकेदार करोड़ों का ठेका लेकर बैठे हैं, कुछ बात होगी तभी तो! पैसे के आगे मंत्री हो या बड़े अधिकारी, सब झुकते हैं।”

विजय ने यह भी दावा किया कि मनोज और मनीष ने शुक्रवार को नाव घाट पर जब पुलिस ने शराब की गाड़ी पकड़ी थी, तो मौके पर पहुंचकर टीआई के सामने एक एसआई को सबके बीच बेइज्जत कर एसपी की धमकी दी थी, जिसके बाद पुलिसकर्मियों का चेहरा देखने लायक था। उसने बताया कि हालांकि भीड़भाड़ वाले इलाके में गाड़ी पकड़ने पर टीआई के निवेदन पर मामला तो बनवा लिया गया, पर उसमें भी उसने छोटे भाई मनोज को बचाकर मनीष पर केस बनवा दिया। और मोहन उपराले की शिकायत पर खुद थाने वालों ने आगे बढ़कर समझौता कर मामला रफा-दफा करवाया है।

सारनी पुलिस और एसपी की ‘तारीफ’ और सीसीटीवी फुटेज की मांग:

यह सब भाषणबाजी विजय उपराले द्वारा पाथाखेड़ा की एक दुकान पर चाय की चुस्की के साथ दी जा रही थी। इस घटनाक्रम के बाद, “हमारे जिले के ईमानदार पुलिस कप्तान और ईमानदार सारनी पुलिस की अच्छी खासी तारीफ चौक-चौराहों पर चल रही है और होना भी चाहिए, क्योंकि शराब ठेकेदार के दलाल विजय के आगे मानो प्रशासन ने घुटने टेक कर मनोज उपराले की लिखित शिकायत होने के बाद भी उसे अभय वरदान देकर छोड़ दिया।”
इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए, मांग की जा रही है कि पुलिस अधीक्षक को 4 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक थाने में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच करनी चाहिए। यह फुटेज ही ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ कर सकेगा और यह बताएगा कि डीजीपी की नसीहतों का कितना पालन हुआ और ‘पैसे के आगे झुके प्रशासन’ के आरोप में कितनी सच्चाई है।

इनका कहना है :-

  • शायद उन दोनों पार्टी के बीच में समझौता हो गया था, जांच आशीष कुमरे कर रहे थे, आप उनसे बात कर जानकारी ले लीजिए।

जयपाल इनवाती
थाना प्रभारी सारनी

  • मोहन उपराले ने पहले मनोज उपराले, देवेंद्र दुबे, सुनिल वर्मा के खिलाफ मारपीट कर 10 हजार छुड़ाने की लिखती शिकायत कि थी, फिर उसी दिन दोबारा मोहन ने कोई कार्यवाही नही चाहते का आवेदन दिया। उनके बीच में समझौता हो गया था।

आशीष कुमरे
जांच अधिकारी एसआई थाना सारनी

  • मेरे साथ मनोज, देवेंद्र, सुनील ने मारपीट कर 10 हजार रुपये छुड़ाने की शिकायत मैंने थाने और एसडीओपी कार्यालय में कि थी, उसके बाद थाने में समझौता हो गया, मैंने लिखकर दे दिया है, मनोज उपराले, देवेंद्र दुबे, सुनिल वर्मा ने मेरे 10 हजार रुपये लौटा दिए है।

मोहन उपराले
शिकायतकर्ता निवासी शोभापुर

नोट:- शिकायतकर्ता मोहन उपराले कि शिकायत, वीडियो वर्जन, थाने में 6 घंटे बिठाकर अनावेदकगण को थाने बुलाकर समझौते की बात के सारे प्रमाण रिकॉर्डिंग सहित हमारे पास सुरक्षित हैं।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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