नमस्कार मध्यप्रदेश वॉइस न्यूज पोर्टल मे आपका स्वागत हैं, खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे  7489579303, 👉बैतूल जिले के हर तहसील में संवाददाता चाहिए। 📞 संपर्क करें।
अनुशासन और ‘गुड टच-बैड टच’ की सीख बनी गले की फांस? शिक्षक सुनील चौधरी के खिलाफ गहरी राजनीतिक साज़िश के आरोप – Madhya Pradesh Voice

Madhya Pradesh Voice

Latest Online Breaking News

अनुशासन और ‘गुड टच-बैड टच’ की सीख बनी गले की फांस? शिक्षक सुनील चौधरी के खिलाफ गहरी राजनीतिक साज़िश के आरोप


WhatsApp Icon

21/08/2026 9:43 PM Total Views: 457252

सारणी। क्या किसी शिक्षक के लिए अपने स्कूल की छात्राओं को मनचलों से बचाना और उन्हें सही-गलत की सीख देना इतना बड़ा अपराध हो सकता है कि उसे जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया जाए? सारणी की शासकीय उच्चतर माध्यमिक कन्या शाला का हालिया विवाद इसी चुभते हुए सवाल को जन्म दे रहा है। शिक्षक सुनील चौधरी पर लगे छेड़छाड़ के आरोपों ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। 21 अगस्त को शिक्षक ने स्वयं थाना सारणी एवं एसडीओपी कार्यालय पहुंचकर न्यायालय की शरण ली और अब वे विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में हैं।

लेकिन, सतह पर जो एक सामान्य अपराध का मामला दिख रहा है, उसकी जड़ें एक गहरी राजनीतिक साज़िश, निजी खुन्नस और शिक्षा के मंदिर को अखाड़ा बनाने की ओछी मानसिकता से जुड़ी हैं। आइए, इस पूरे घटनाक्रम की परतों को खोलते हैं।

ताजा खबरों को देखने के लिए , यहाँ क्लिक करके हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें

विवाद की असली जड़: ‘मनचलों पर लगाम’ और ‘सख्त अनुशासन’

स्थानीय लोगों और अभिभावकों के बीच शिक्षक सुनील चौधरी की छवि एक ऐसे सख्त गुरु की रही है, जो शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन से कभी समझौता नहीं करते। स्कूल गेट के बाहर अक्सर कुछ मनचले और आवारा किस्म के युवक चक्कर काटते थे, जिन पर शिक्षक सुनील चौधरी आए दिन न सिर्फ रोक-टोक करते थे, बल्कि उन्हें फटकार कर भगाते भी थे। कई बार उन्होंने छात्राओं के परिजनों को भी इस बात की सूचना दी थी।

Read Our Photo Story
यहाँ क्लिक करके हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

इसी बीच 15 अगस्त के दिन उन्होंने छात्राओं को ‘गुड टच और बैड टच’ (Good Touch and Bad Touch) को लेकर एक संवेदनशील समझाइश दी। सूत्रों का कहना है कि शिक्षक की यही रोक-टोक और सख्ती कुछ छात्राओं (जो संभवतः उन बाहरी युवकों के प्रभाव में थीं) को नागवार गुजरी। इसी द्वेष भावना का फायदा उठाकर एक मनगढ़ंत और बेबुनियाद कहानी रची गई ताकि शिक्षक की छवि को हमेशा के लिए धूमिल किया जा सके।

राजनीतिक गिद्धों का जमावड़ा: निशाना शिक्षक या उनका भाई?

जैसे ही यह मामला सामने आया, सारणी का स्कूल परिसर रातों-रात राजनीतिक दलों का अखाड़ा बन गया। आखिर एक स्कूल के आंतरिक मामले में अचानक इतने नेताओं की एंट्री कैसे हो गई? इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण है— शिक्षक सुनील चौधरी के भाई विलास चौधरी का भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता होना।

विरोधी खेमों और दूसरे राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस विभागीय शिकायत को अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए ‘हथियार’ बना लिया। घटना की जानकारी मिलते ही नगर मंत्री मानस सिंह, निहाल चौकीकर और समीर यादव स्कूल पहुंच गए। जिलाध्यक्ष रोहन सिंह ठाकुर भोपाल से सीधे कन्या शाला पहुंचे और एसडीओपी प्रियंका करचाम को 24 घंटे में थाना घेरने की चेतावनी दे डाली। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी स्कूल पहुंचकर राजनीतिक रोटियां सेंकने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

यह साफ दर्शाता है कि छात्राओं के हित से ज्यादा, इन दलों की दिलचस्पी एक भाजपा कार्यकर्ता के भाई (शिक्षक) को फंसाकर अपना राजनीतिक दबदबा कायम करने में थी।

19 और 20 अगस्त का खौफनाक सच: प्राचार्य और स्टाफ की गवाही

इस पूरे मामले में सबसे मजबूत पक्ष स्कूल के प्राचार्य और समस्त स्टाफ का है, जो चट्टान की तरह अपने साथी शिक्षक के बचाव में खड़े हैं। प्राचार्य अंजनी भालेकर द्वारा सारणी थाने में दिए गए लिखित आवेदन में रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हुए हैं। छात्राओं ने जब लिखित शिकायत दी, तो प्रबंधन ने तत्काल एक्शन लिया। पालकों को बुलाया गया और पूरे स्टाफ की मौजूदगी में शिक्षक का बयान दर्ज हुआ। शिक्षक ने आरोपों को सिरे से खारिज किया। सबसे अहम बात यह है कि पालकों ने किसी भी तरह की पुलिस एफआईआर से साफ इनकार कर दिया था और केवल शिक्षक के स्थानांतरण की मांग की थी, क्योंकि स्कूल स्तर पर कार्रवाई शुरू हो चुकी थी।

जब मामला शांत हो रहा था, तभी राजनीतिक शह प्राप्त कुछ असामाजिक तत्व शराब के नशे में बिना किसी अनुमति के कन्या शाला में घुस आए। उन्होंने कक्षाओं में घुसकर बच्चियों को डराया-धमकाया। इन आवारा तत्वों ने स्कूल का माहौल पूरी तरह दूषित कर दिया। महिला स्टाफ के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और वे किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थे। इन बाहरी तत्वों ने छात्राओं को बरगलाया और स्कूल के समय में, बिना प्राचार्य या परिजनों की अनुमति के, बच्चियों को रैली के रूप में सड़क पर उतारकर थाने ले गए।

प्रशासन और समाज के मुंह पर करारे सवाल

📌 अगर शिक्षक दोषी है, तो पूरा स्कूल प्रबंधन और महिला स्टाफ उनके समर्थन में लिखित शिकायत क्यों दे रहा है?

📌 शराब पीकर कन्या शाला में घुसने वाले, महिला शिक्षकों से अभद्रता करने वाले और बच्चियों को जबरन थाने ले जाने वाले उन असामाजिक तत्वों और नेताओं पर पुलिस ने अब तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की?

📌 क्या अब स्कूलों के आंतरिक मामलों का फैसला शिक्षा विभाग करेगा या सड़क पर उतरकर गुंडागर्दी करने वाले राजनीतिक कार्यकर्ता?

शिक्षक सुनील चौधरी का 21 अगस्त को शांतिपूर्ण तरीके से खुद थाने जाकर गिरफ्तारी देना और न्यायालय की शरण लेना, कानून के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है। लेकिन यह घटनाक्रम सिर्फ एक सुनील चौधरी का नहीं है। यदि एक शिक्षक को छात्राओं को सही दिशा दिखाने और मनचलों से भिड़ने की यह कीमत चुकानी पड़ेगी, तो भविष्य में कोई भी गुरु बच्चों को सुधारने का जोखिम नहीं उठाएगा। पुलिस और प्रशासन को राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर इस पूरे ‘सुनियोजित षड्यंत्र’ की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और उन लोगों के चेहरे बेनकाब करने चाहिए, जिन्होंने मासूम बच्चियों के कंधों पर बंदूक रखकर अपनी राजनीतिक दुश्मनी निकाली है।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


लाइव कैलेंडर

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31