नमस्कार मध्यप्रदेश वॉइस न्यूज पोर्टल मे आपका स्वागत हैं, खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे  7489579303, 👉बैतूल जिले के हर तहसील में संवाददाता चाहिए। 📞 संपर्क करें।
घोड़ाडोंगरी जनपद की सबसे बड़ी ‘लूट’: पहली ही बारिश में ढह गया 24 लाख का तालाब, 5 साल से सिर्फ कागजों पर वजूद – Madhya Pradesh Voice

Madhya Pradesh Voice

Latest Online Breaking News

घोड़ाडोंगरी जनपद की सबसे बड़ी ‘लूट’: पहली ही बारिश में ढह गया 24 लाख का तालाब, 5 साल से सिर्फ कागजों पर वजूद


WhatsApp Icon

19/06/2026 10:44 PM Total Views: 427447

सरकारी राशि की बंदरबांट का जीता-जागता उदाहरण बनी चोपना पंचायत |

मनरेगा के नियमों को ताक पर रखकर फर्जी मस्टरोल से निकाले पैसे |

ताजा खबरों को देखने के लिए , यहाँ क्लिक करके हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें

8 पीड़ित किसानों की आपबीती

Read Our Photo Story
यहाँ क्लिक करके हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

सारणी/चोपना। विकास के दावों की आड़ में सरकारी खजाने को दीमक की तरह चाटने वाले ‘दलालों’ ने घोड़ाडोंगरी ब्लॉक की चोपना पंचायत को भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा बना दिया है। इस क्षेत्र में जनता के हक के पैसों से अपनी जेबें भरने वाले कुछ रसूखदार ‘पुरातत्व जीवों’ (लंबे समय से जमे बिचौलिए) ने लूट का ऐसा जाल बुना है, जिसने पूरी व्यवस्था को शर्मसार कर दिया है। विकास के नाम पर चारों तरफ मची इस लूट का सबसे बड़ा और जीता-जागता उदाहरण चोपना नंबर-01 में देखने को मिला है, जहाँ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत बनाया गया एक तालाब अपनी बदहाली और भ्रष्टाचार की कहानी खुद बयां कर रहा है।

पहली ही बारिश में खुली पोल, टल गया बड़ा हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 में चोपना नंबर-01 स्थित सुषमा नामक महिला के खेत के पास लगभग 24 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से एक तालाब का निर्माण कराया गया था। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में इस कदर घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था कि पहली ही बारिश का पानी भरते ही बांध की बुनियादी कमजोरी सामने आ गई। बांध के टूटने और किसी बड़े हादसे की आशंका को देखते हुए आनन-फानन में स्पिलवे को तोड़कर पानी की निकासी करनी पड़ी। नतीजा यह हुआ कि चंद महीनों के भीतर ही 24 लाख की लागत से बना यह तालाब पूरी तरह ढह गया।

5 साल बीते, धरातल पर सिर्फ शून्य

चौंकाने वाली बात यह है कि इस घटना को लगभग 5 साल बीत चुके हैं, लेकिन पंचायत प्रशासन द्वारा आज तक न तो इस तालाब की मरम्मत (रिपेयर मोड) कराई गई और न ही संबंधित ठेकेदारों या जिम्मेदारों पर कोई आपत्ति उठाई गई। आज स्थिति यह है कि यह तालाब धरातल पर न होकर सिर्फ सरकारी कागजों और फाइलों में तैर रहा है।

दलालों की सोची-समझी साजिश या किसानों की जरूरत?

इस पूरे मामले को देखकर अब जनता के बीच यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या यह तालाब वाकई किसानों की भलाई के लिए बनाया गया था या फिर पंचायत में बैठे दलालों द्वारा सरकारी पैसों को सुनियोजित तरीके से लूटने की एक सोची-समझी साजिश थी?

मनरेगा का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब महिला एवं पुरुषों को 100 दिन का सुनिश्चित रोजगार देना है। लेकिन चोपना पंचायत में इन सभी नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी मजबूत बुनियाद के निर्माण कार्यों को धड़ल्ले से अंजाम दिया जा रहा है।

सूत्रों की मानें तो पंचायत के आसपास मंडराने वाले कुछ शातिर बिचौलिए क्षेत्र में जलकूप, खेत तालाब और सड़क निर्माण जैसे कार्यों को प्रस्तावित करवाते हैं। इसके बाद फर्जी मस्टरोल (Master Roll) तैयार कर बखूबी सरकारी पैसा निकाल लेते हैं और आपस में बंदरबांट कर लेते हैं। इस खेल में चंद रुपयों के लालच में अपना जॉब कार्ड दूसरों को सौंपने वाले ग्रामीण भी कहीं न कहीं अनजाने में इस भ्रष्टाचार के भागीदार बन रहे हैं।

भोले-भाले किसानों को बहला-फुसलाकर कराया निर्माण

इस घोटाले का सबसे दर्दनाक पहलू उन 8 स्थानीय किसानों से जुड़ा है, जिन्होंने इस तालाब को प्रस्तावित किए जाने से पहले कई बार अपनी नामंजूरी दी थी। वे जानते थे कि यहाँ तालाब की रूपरेखा सही नहीं है। लेकिन निर्माण कार्य के नाम पर मोटी रकम डकारने में माहिर दलालों ने इन भोले-भाले किसानों को सुनहरे सपने दिखाकर और बहला-फुसलाकर तालाब का निर्माण करवा दिया। आज आलम यह है कि उन पीड़ित किसानों को इस तालाब से एक बूंद पानी भी नसीब नहीं हुआ और उनकी जमीन भी इस भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।

क्षेत्र की जनता पूछ रही सवाल

चोपना पंचायत की जनता अब प्रशासन और आला अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल उठा रही है। 24 लाख रुपये की इस भारी बर्बादी और फर्जी मस्टरोल के जरिए हो रही बंदरबांट पर आखिर कब तक पर्दा डाला जाएगा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की टीम इस स्थल का निरीक्षण कर दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करेगी, या फिर चोपना पंचायत में विकास के नाम पर ‘लूट का यह खेल’ यूं ही अनवरत चलता रहेगा?

इनका कहना है:—

मैने तो अभी चार्ज लिया हु पहली बार सुन रहा हु यह मामला, और इतना बड़ा काम पंचायत विभाग का नहीं हो सकता RES का है वह काम। आपको मै कुछ नहीं बता सकता संबंधित विभाग से जानकारी लीजिए।

📌 विनोद चौरसिया, सचिव ग्राम पंचायत चोपना

👉🏽 जहां तक मेरे संज्ञान में नहीं है कि यह तलब हमारे विभाग का काम है, फिर भी पहले में जानकारी लेती हु फिर मैं आपको बता पाऊंगी।

📌 योगिता पाटिल, सहायक यंत्री, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग घोड़ाडोंगरी

 

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


लाइव कैलेंडर

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930