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‘जुआ सरगना’: पुलिस की नाक के नीचे चल रहा अवैध कारोबार, रसूख के आगे बेबस कानून? – Madhya Pradesh Voice

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‘जुआ सरगना’: पुलिस की नाक के नीचे चल रहा अवैध कारोबार, रसूख के आगे बेबस कानून?


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21/05/2026 7:27 PM Total Views: 410192

सारणी। सिवनपाठ, दुलारा और सालीवाडा के जंगलों के बीच एक ऐसा ‘जुआ साम्राज्य’ फल-फूल रहा है, जिसने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि ‘आशिक’ नामक व्यक्ति द्वारा संचालित यह जुआ फड़ न केवल बड़े स्तर पर चल रहा है, बल्कि यहाँ से होने वाली ‘नाल’ की कमाई ने क्षेत्र में कई लोगों को मालामाल कर दिया है।

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खेत बन गए जुए के अड्डे, ‘हितैषी’ के चेहरे पर नकाब

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जो व्यक्ति खुद को सालीवाडा गांव की जनता का हितेषी बताता है, उसी के खेतों की बगल की जंगल में तो कभी दुलारा डैम के पास अवध माता मंदिर के जंगलों में जुए का फड़ सज रहा है। सूत्रों की मानें तो यह कारोबार इतने व्यवस्थित तरीके से चल रहा है कि सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जुआरियों के लिए सबसे बड़ी शर्त ‘डिजिटल सेंसरशिप’ है। फड़ में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को अपना मोबाइल बाहर ही छोड़ना पड़ता है, ताकि वीडियो या फोटो वायरल न हो सके। यह डर सिर्फ पुलिस का नहीं, बल्कि साक्ष्य मिटाने की एक सोची-समझी रणनीति है।

पुलिस की छापेमारी या महज खानापूर्ति?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर पुलिस इन ठिकानों तक पहुँचने में नाकाम क्यों है? ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस जब भी छापेमारी के लिए निकलती है, जुआ संचालक तक इसकी भनक पहले ही पहुँच जाती है। हाल ही में एक सारनी से एक सिपाही जब रेकी करने पहुँचा, तो उसकी फोटो तुरंत सरगना के मोबाइल पर पहुँच गई। यह स्पष्ट करता है कि जुआ संचालक का तंत्र पुलिस विभाग के भीतर ही सक्रिय है।

क्या यह महज संयोग है कि आज तक इस सरगना पर जुआ एक्ट के तहत कोई ठोस मामला दर्ज नहीं हो पाया? चर्चाओं का बाजार गर्म है कि पुलिस की मिलीभगत और ‘एंट्री’ के खेल ने कानून के हाथ बांध दिए हैं।

जंगल की आड़ में ‘छोटा ड्रामा’

क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति यानी सिवनपाठ और दुलारा का कठिन इलाका पुलिस के लिए हमेशा से एक चुनौती रहा है। लेकिन जब पुलिस खाली हाथ लौटती है, तो कहीं न कहीं उनकी साख पर बट्टा लगता है। ऐसी खबरें भी हैं कि पुलिस की किरकिरी से बचने के लिए कभी-कभी किसी छोटे-मोटे फड़ पर कार्रवाई कर ‘मामला शांत’ कराने का ड्रामा किया जाता है, जबकि असली मास्टरमाइंड और बड़ा फड़ आज भी पुलिस की पकड़ से दूर है।

सालीवाड़ा का ‘सेटलमेंट’: बिक गया ईमान?

दुलारा के चौक चराहे पर  चर्चा गर्म है कि, कुछ दिन पूर्व सालीवाड़ा में जुए के फड़ को लेकर एक बड़ा ‘सेटलमेंट’ हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, कानून की कार्रवाई से बचने के लिए मोटी रकम का लेनदेन हुआ, जिसके बाद यह अवैध कारोबार फिर से बदस्तूर जारी है। जिस तरह से पुलिस की दबिश की खबर माफिया तक ‘रीयल-टाइम’ में पहुँचती है, उससे साफ है कि विभाग के भीतर ही कोई ‘गद्दार’ बैठा है जो अपनी जेब भरने के लिए वर्दी की गरिमा को दांव पर लगा रहा है।

जनता की उम्मीद और प्रशासन की चुप्पी

जुआ एक्ट एक गंभीर अपराध है, लेकिन सिवानपाठ, दुलार और सालीवाडा में यह एक ‘खुले आम धंधे’ जैसा हो गया है। क्या उच्च अधिकारी इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए कोई विशेष टीम का गठन करेंगे, या फिर यह ‘जुआ माफिया’ इसी तरह कानून को ठेंगा दिखाता रहेगा?

आम जनता अब यह पूछने को मजबूर है कि अगर पुलिस के पास पूरी जानकारी है, तो फिर कार्रवाई के नाम पर केवल ‘खानापूर्ति’ क्यों? क्या पुलिस और जुआ सरगना के बीच का यह ‘अघोषित गठबंधन’ कभी टूटेगा?

इस पूरे मामले पर संबंधित थाना प्रभारी या उच्च अधिकारियों का पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है। क्या पुलिस आने वाले समय में इस नेटवर्क को नेस्तनाबूद कर पाएगी? यह बड़ा प्रश्न बना हुआ है।

इनका कहना है:—

आशिक नाम का व्यक्ति के द्वारा जुआ संचालित करने की जानकारी मुझे नहीं थी आपके द्वारा मिली आप लोकेशन बताइए हमारे द्वारा कार्यवाही की जाएगी।

रवि शाक्य, थाना प्रभारी चोपना

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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