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लाखों की लागत से बना नगर पालिका का पार्क बना निजी जागीर, बच्चों को धमकाकर रिटायर्ड कर्मचारी ने जड़ा ताला, प्रशासन मौन – Madhya Pradesh Voice

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लाखों की लागत से बना नगर पालिका का पार्क बना निजी जागीर, बच्चों को धमकाकर रिटायर्ड कर्मचारी ने जड़ा ताला, प्रशासन मौन


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20/05/2026 10:34 PM Total Views: 461200

सारणी। शहर में सार्वजनिक संपत्तियों पर एकाधिकार जताने और दबंगई के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा और बेहद हैरान करने वाला मामला सारणी के वार्ड क्रमांक 1 (बाबा मट्ठाहरदेव वार्ड) से सामने आया है। यहाँ नगर पालिका परिषद सारणी द्वारा लाखों रुपये के सरकारी खर्च से बनाया गया क्रीड़ांगन (पार्क) अब द्वेष भावना और रसूखदारों की मनमानी का शिकार हो गया है। हैरानी की बात यह है कि सरकारी संपत्ति को ‘निजी जागीर’ समझने की इस पूरी गुंडागर्दी पर नगर पालिका प्रशासन ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक 1 में राहुल गैस एजेंसी के ठीक सामने स्थित इस नवनिर्मित पार्क पर, सामने ही निवास करने वाले एमपीपीजीसीएल (MPPGCL) के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी श्री चौकीकर ने अपना अघोषित कब्जा जमाने का प्रयास किया। आरोप है कि उन्होंने लगातार चार दिनों तक इस सार्वजनिक पार्क के गेट पर ताला जड़कर इसे पूरी तरह से बंद रखा।

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यह वही पार्क है जिसका निर्माण नगर पालिका ने इसलिए करवाया था ताकि सुबह-शाम वार्ड के बुजुर्ग यहाँ आकर अपना समय व्यतीत कर सकें और बच्चे खेल-कूद सकें। लेकिन एक व्यक्ति की मनमानी ने चार दिनों तक सैकड़ों लोगों को इस सुविधा से वंचित रखा।

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मासूमों पर धौंस और धमकियां

पार्क में खेलने आने वाले मासूम बच्चों ने दबी जुबान में अपनी पीड़ा जाहिर की है। बच्चों का कहना है कि जब भी वे यहाँ झूला झूलने या खेलने आते हैं, तो श्री चौकीकर उन्हें बुरी तरह डांटते-डपटते हैं। उन्हें डरा-धमका कर भगा दिया जाता है, मानो यह पार्क उनकी निजी संपत्ति हो। इसी द्वेष भावना और रोब झाड़ने की मानसिकता के चलते उन्होंने बच्चों को धमकाते हुए पार्क में ताला लगा दिया था।

विरोध के बाद लौटाई चाबी, लेकिन सवाल बरकरार

सरकारी पार्क को चार दिन तक बंधक बनाए रखने के बाद जब स्थानीय लोगों के सब्र का बांध टूटा और इस तानाशाही के खिलाफ तीखी आपत्तियां दर्ज की जाने लगीं, तब जाकर भारी दबाव में बुधवार शाम को श्री चौकीकर द्वारा पार्क की चाबी सुपुर्द की गई। इसके बाद ही बच्चों और बुजुर्गों के लिए पार्क के दरवाजे दोबारा खुल सके।

नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

इस पूरी घटना ने नगर पालिका परिषद सारणी की लचर मॉनिटरिंग और प्रशासनिक लापरवाही पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। क्या नगर पालिका लाखों रुपये खर्च करके सिर्फ इसलिए पार्क बनाती है ताकि कोई भी प्रभावशाली व्यक्ति उस पर अपना ताला जड़ सके? जब चार दिनों तक सरकारी संपत्ति पर अवैध रूप से ताला लटका रहा, तो नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी कहाँ सो रहे थे? क्या प्रशासन का यह मौन ऐसे अतिक्रमणकारियों और दबंगों के हौसले बुलंद नहीं कर रहा है?

सार्वजनिक पार्क में अपनी धौंस जमाकर बच्चों के खेलने का अधिकार छीनने वाले ऐसे लोगों पर नगर पालिका प्रशासन मौन क्यों है, यह समझ से परे है। जनता अब यह मांग कर रही है कि प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से जागे और सरकारी संपत्ति को अपनी निजी जागीर समझने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो।

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