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एमपीपीजीसीएल प्रबंधन की घोर लापरवाही: पोकलेन मशीन ने तोड़ा हाई वोल्टेज तार, युवक के गले में फंसा, बाल-बाल बची जान – Madhya Pradesh Voice

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एमपीपीजीसीएल प्रबंधन की घोर लापरवाही: पोकलेन मशीन ने तोड़ा हाई वोल्टेज तार, युवक के गले में फंसा, बाल-बाल बची जान


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20/05/2026 1:43 PM Total Views: 410188

बिना सुरक्षा मानकों के चल रहा था डिस्मेंटल कार्य, टल गया एक बड़ा और जानलेवा हादसा

सारणी। मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी (एमपीपीजीसीएल) के सारणी प्लांट में सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्रबंधन और ठेकेदारों की लापरवाही के चलते बुधवार को यहां एक बड़ा और जानलेवा हादसा होते-होते टल गया। मुख्य अभियंता कार्यालय के सामने चल रहे डिस्मेंटल कार्य के दौरान एक पोकलेन ऑपरेटर की भारी चूक से प्लांट की हाई वोल्टेज लाइन टूटकर सड़क पर गिर गई। तार वहां से गुजर रहे एक 19 वर्षीय युवक के गले में जा फंसा, जिससे वह गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गया। गनीमत यह रही कि इस घटना में युवक की जान बच गई, अन्यथा एक बड़ी त्रासदी हो सकती थी।

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ऐसे हुआ यह दिल दहला देने वाला हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना बुधवार सुबह लगभग 11:45 बजे की है। मुख्य अभियंता कार्यालय के सामने डिस्मेंटल का कार्य चल रहा है। यहां से एक पोकलेन मशीन डिस्मेंटल की गई सामग्री को एकत्रित कर वापस प्लांट के 1 नंबर गेट की ओर जा रही थी। पोकलेन ऑपरेटर की लापरवाही का आलम यह था कि वह मशीन का ‘बूम’ (आगे का हिस्सा) हवा में ऊपर उठाकर ही सड़क पार कर रहा था।

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इसी दौरान उठा हुआ बूम प्लांट के अंदर से सीएचपी (कोल हैंडलिंग प्लांट) की ओर जाने वाली हाई वोल्टेज लाइन में फंस गया। तार टूटकर सीधे जमीन पर आ गिरा। उसी समय मोरडोंगरी निवासी 19 वर्षीय पीयूष (पिता महेश पवार) वहां से गुजर रहा था। तार सीधे पीयूष के गले में फंस गया और वह झटके से गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

मौत के मुंह से बाल-बाल बचा युवक

यह महज एक संयोग और पीयूष की अच्छी किस्मत थी कि उसकी जान बच गई। बताया जा रहा है कि हाई वोल्टेज केबल में कहीं कट नहीं लगा था, जिससे करंट नहीं फैला। इसके अलावा पोकलेन की गति धीमी होने के कारण युवक मशीन के नीचे आने से भी बच गया। यदि तार में जरा सा भी कट होता तो लोहे से बनी पोकलेन मशीन (जो कि विद्युत की सुचालक है) में भी करंट दौड़ जाता। ऐसी स्थिति में पोकलेन ऑपरेटर और चपेट में आए युवक, दोनों की ही मौके पर दर्दनाक मौत हो सकती थी।

सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति, उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने एमपीपीजीसीएल परिसर में चल रहे कार्यों की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा कर इतने बड़े और जोखिम भरे डिस्मेंटल कार्य के दौरान सड़क पर यातायात और लोगों को रोकने के लिए कोई सुरक्षा कर्मी तैनात नहीं किया गया था। कार्य स्थल के आस-पास आमजन को सचेत करने के लिए कोई सूचना या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया था। बिना बूम नीचे किए सड़क पार करना सीधे तौर पर ऑपरेटर की अकुशलता और कार्यस्थल पर मॉनिटरिंग की कमी को दर्शाता है।

लगातार हो रही दुर्घटनाएं, प्रबंधन मौन

एमपीपीजीसीएल में यह कोई पहला मामला नहीं है। हाल ही के दिनों में यहां एक के बाद एक कई दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जो यह साबित करती हैं कि प्रबंधन सुरक्षा को लेकर कितना लापरवाह और उदासीन है। ठेकेदारों को काम सौंपने के बाद सुरक्षा मानकों की कोई निगरानी नहीं की जा रही है।

स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि प्रबंधन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा है। समय रहते यदि दोषी ऑपरेटर, संबंधित ठेकेदार और सुरक्षा में कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और भी विकराल रूप ले सकती हैं।

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