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बैतूल में आसमान से बरसती आग का कहर, पहाड़ियों पर धधकती ज्वाला, तड़प-तड़प कर मरीं हजारों मछलियां – Madhya Pradesh Voice

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बैतूल में आसमान से बरसती आग का कहर, पहाड़ियों पर धधकती ज्वाला, तड़प-तड़प कर मरीं हजारों मछलियां


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30/04/2026 9:41 PM Total Views: 436088

बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में इस वर्ष भीषण गर्मी और चढ़ते पारे ने विकराल रूप धारण कर लिया है। आसमान से बरसती आग का असर अब इंसानों के साथ-साथ प्रकृति, जलस्रोतों और बेजुबान वन्यजीवों पर भी बेहद दर्दनाक रूप में देखने को मिल रहा है। जिले से दो दिल दहला देने वाली घटनाएं सामने आई हैं— एक तरफ सारणी की पहाड़ियों पर भीषण आग का तांडव दिखा, तो दूसरी तरफ खेड़ीसावलीगढ़ में पानी की कमी से हजारों मछलियों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। ये घटनाएं स्पष्ट कर रही हैं कि बढ़ता तापमान अब एक बड़े पर्यावरणीय संकट का रूप ले चुका है।

सारनी:100 फीट ऊंची लपटों में खाक हुए बेजुबान

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अरावली की तरह अड़िग सारणी नगर के आस्था के प्रमुख केंद्र बाबा मठार देव की पहाड़ियों के जंगल में लगी भीषण आग ने ऐसा कहर बरपाया कि देखने वालों की रूह कांप गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग की लपटें लगभग 100 फीट की ऊंचाई तक उठ रही थीं। यह खौफनाक मंजर लगातार 7 घंटों तक अपनी तबाही मचाता रहा। पहाड़ी की अत्यधिक ऊंचाई और दुर्गम रास्तों के कारण इस आग पर काबू पाना किसी के बस में नहीं था। लोग केवल लाचार होकर प्रकृति के इस तांडव को भभकते हुए देखने के लिए विवश थे। इस विकराल अग्नि त्रासदी में न जाने कितने बेजुबान पशु-पक्षियों और वन्यजीवों ने अपनी जान गंवाई होगी, इसका केवल अंदाजा ही लगाया जा सकता है।

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खेड़ीसावलीगढ़: ऑक्सीजन की कमी से मछलियों की दर्दनाक मौत

दूसरी ओर, खेड़ीसावलीगढ़ क्षेत्र की ग्राम पंचायत खेड़ी के पंचायती तालाब में एक बेहद विचलित करने वाली त्रासदी सामने आई है। यहां लगातार बढ़ते तापमान और जलस्तर गिरने के कारण हजारों मछलियों की मौत हो गई। लगभग 2 एकड़ (0.9 हेक्टेयर) क्षेत्र में फैला यह तालाब मुख्य रूप से बरसाती पानी से भरता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह तालाब आमतौर पर पूरी तरह कभी नहीं सूखता था, लेकिन इस बार गर्मी इतनी भीषण है कि पानी तेजी से वाष्पीकृत हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सुबह के समय बड़ी संख्या में मछलियां पानी की सतह पर उछलती और तड़पती नजर आईं, जो पानी में ऑक्सीजन खत्म होने का सीधा संकेत था। पानी कम होने से वह अत्यधिक गर्म और गंदा हो गया था, जिससे मछलियों का दम घुटने लगा।

बचाव के हर मुमकिन प्रयास हुए विफल

मछलियों को बचाने के लिए तालाब के ठेकेदार छुट्टू खड़िया ने अपनी तरफ से भरसक प्रयास किए। स्थिति को संभालने और पानी का तापमान कम करने के लिए बाहर से पानी के टैंकर मंगाकर तालाब में डाले गए। मछलियों को राहत देने के लिए पानी में ग्लूकोज तक डाला गया, लेकिन हालात इतने बिगड़ चुके थे कि इन प्रयासों का कोई खास असर नहीं हुआ। ठेकेदार ने ग्राम पंचायत से जेसीबी मशीन के माध्यम से तालाब में तुरंत सुधार कार्य (गहरीकरण) कराने की अनुमति मांगी है, ताकि शेष मछलियों को बचाया जा सके।

मत्स्य पालन विभाग का बयान और चेतावनी

घटना की जानकारी मिलने के बाद मत्स्य पालन विभाग के निरीक्षक चेतन भावसार ने स्थिति का मुआयना किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तालाब का जलस्तर तेजी से कम होने और चिलचिलाती धूप से पानी का तापमान बढ़ने के कारण, पानी में घुली हुई ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) की मात्रा बेहद घट गई है। यही मछलियों की सामूहिक मौत का मुख्य वैज्ञानिक कारण है। बीमारी और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए विभाग ने सख्त सलाह दी है कि मरी हुई मछलियों को तुरंत गड्ढा खोदकर सुरक्षित तरीके से गाड़ दिया जाए। वहीं, जो मछलियां जीवित हैं, उन्हें जल्द से जल्द निकालकर बाजार में बेच दिया जाए।

जिले में लगातार बढ़ता तापमान और जलस्रोतों का दम तोड़ना एक गहरी चिंता का विषय है। यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण और जल संचयन की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में हमें इसके और भी गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

 

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