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डब्लूसीएल तवा-2 खदान: मजदूरों के हक पर डाका, ठेकेदारों के दमनकारी हथकंडों के बीच 11वें दिन भी जारी है संग्राम


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09/03/2026 11:22 PM Total Views: 367414

बैतूल/सारनी। वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) के पाथाखेड़ा क्षेत्र की तवा–2 भूमिगत कोयला खदान में ठेका मजदूरों का अनिश्चितकालीन आंदोलन सोमवार को 11वें दिन भी पूरे आक्रोश के साथ जारी रहा। पिछले 20 वर्षों से आर्थिक रूप से कमजोर और कम पढ़े-लिखे मजदूरों का खून चूस रही यह व्यवस्था अब अपने चरम पर है। मजदूरों का आरोप है कि उनका बकाया वेतन रोका जा रहा है और खुलेआम शोषण हो रहा है।

लगातार 11 दिनों के इस संघर्ष ने यह पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है कि ठेकेदार और कुछ भ्रष्ट अधिकारी मजदूरों की आवाज दबाने के लिए किस हद तक जा सकते हैं। आंदोलन को कुचलने के लिए ठेकेदारों द्वारा अपनाए जा रहे हथकंडे न केवल अनैतिक हैं, बल्कि अमानवीय और गैर-कानूनी भी हैं।

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मजदूरों की एकता तोड़ने के लिए ठेकेदारों के 4 घिनौने हथकंडे

घटनाक्रम साफ दर्शाता है कि ठेकेदार एक सोची-समझी साजिश के तहत आंदोलन को तार-तार करने में लगे हैं। इन 11 दिनों में ठेकेदारों ने दमन के कई तरीके आजमाए हैं।

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हथकंडा 1: साफ इनकार और आर्थिक नाकेबंदी (आंदोलन का दूसरा दिन)

  • मजदूरों के विरोध को हल्के में लेते हुए ठेकेदारों ने शुरुआत में ही बकाया राशि देने से साफ इनकार कर दिया। उनका उद्देश्य मजदूरों को आर्थिक रूप से तोड़ना था ताकि वे हार मानकर वापस काम पर लौट आएं।

हथकंडा 2: ‘फूट डालो और राज करो’ तथा झूठा प्रचार (आंदोलन का चौथा दिन)

  • प्रबंधन की आंखों में धूल झोंकने में माहिर इन ठेकेदारों ने खुलेआम यह झूठ फैलाना शुरू किया कि सभी श्रमिकों का पूरा भुगतान कर दिया गया है। असलियत में, मजदूरों को उनके दो महीने के वेतन के बजाय महज 10 से 15 दिनों की हाजिरी का पैसा थमाया गया। कुछ चुनिंदा मजदूरों को आंशिक भुगतान करके ठेकेदारों ने मजदूर एकता को तोड़ने और उनके बीच अविश्वास पैदा करने की कुत्सित कोशिश की।

हथकंडा 3: खातों में पैसा डालकर वापस छीनना और ब्लैकमेलिंग (आंदोलन का आठवां दिन)

  • ठेकेदारों की संवेदनहीनता और नीचता उस वक्त सारी हदें पार कर गई जब उन्होंने गरीब महिला कर्मचारियों के हक पर भी डाका डाला। आक्रोशित महिला मजदूरों ने खुलासा किया कि ठेकेदार एक घटिया साजिश के तहत महिलाओं के बैंक खातों में वेतन डालते हैं और फिर बेशर्मी से दबाव बनाकर उस पैसे को नकद वापस मांगते हैं। जो महिलाएं इस खुली बेईमानी का विरोध करती हैं, उन्हें काम से निकाल दिया जाता है। शनिवार को इसका प्रत्यक्ष प्रमाण तब मिला जब एक महिला मजदूर को पैसे न लौटाने की सजा के तौर पर खदान में जाने से रोक दिया गया।

हथकंडा 4: बाहुबल और आतंक का खुला प्रदर्शन (आंदोलन का 11वां दिन)

  • सोमवार सुबह करीब 8 बजे, ठेकेदार जे.के. इंफो के जाहिद खान ने खौफ का माहौल बनाने के लिए प्राइवेट बंदूकधारी गार्डों के साथ बाहरी अनस्किल्ड मजदूरों को तवा-2 खदान में काम के लिए भेजा। यह आंदोलनकारी मजदूरों को डराने और उनकी जगह बाहरी लोगों को रखकर हड़ताल को पूरी तरह कुचलने का सीधा प्रयास था।

प्रशासनिक हस्तक्षेप और मजदूरों का पलटवार

आंदोलनकारी मजदूरों ने बंदूकधारियों की मौजूदगी का कड़ा विरोध किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तवा-2 खदान के सब एरिया मैनेजर सत्यनारायण ने तत्काल हस्तक्षेप किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि खदान में केवल बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त मजदूर ही जा सकते हैं, और अधिकारियों को फोन कर निजी गार्डों को तुरंत खदान परिसर से बाहर खदेड़ने के निर्देश दिए।

बाद में, पाथाखेड़ा चौकी पुलिस ने भी मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई की। श्रमिक नेता प्रदीप नागले, संतोष देशमुख और मनोज पवार ने थाना प्रभारी जयपाल इवनाती को इस पूरे दमन चक्र और घटनाक्रम से अवगत कराया है। मजदूरों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि यह शोषण और बाहरी मजदूरों की घुसपैठ नहीं रुकी, तो आंदोलन अब और अधिक उग्र होगा।

आगे की रणनीति: अब निर्णायक मोड़ पर लड़ाई

वर्षों के अन्याय और ठेकेदारों के इन तमाम हथकंडों से पार पाते हुए, मजदूरों का यह संघर्ष अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। मजदूरों ने तय किया है कि वे मंगलवार सुबह जिला कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी से मिलकर ज्ञापन सौंपेंगे। श्रम विभाग में ठेकेदारों की इन गैर-कानूनी हरकतों (जैसे खातों से पैसे वापस लेना) की शिकायत करेंगे। अनुसूचित जनजाति विभाग में भी इस व्यवस्थित शोषण के खिलाफ मामला दर्ज कराएंगे।

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