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सतपुड़ा ताप विद्युत गृह: सुरक्षा विभाग की ‘सरपरस्ती’ में फल-फूल रही गुंडागर्दी, जान से मारने की धमकी देने वालों के गेट-पास रद्द करने में कांपे अधिकारियों के हाथ – Madhya Pradesh Voice

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सतपुड़ा ताप विद्युत गृह: सुरक्षा विभाग की ‘सरपरस्ती’ में फल-फूल रही गुंडागर्दी, जान से मारने की धमकी देने वालों के गेट-पास रद्द करने में कांपे अधिकारियों के हाथ


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03/01/2026 11:48 AM Total Views: 363165

सारनी। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह (STPS) जैसे अति-संवेदनशील संस्थान में सुरक्षा के नियम क्या केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं? यह सवाल तब खड़ा हुआ जब बीएमडी-4 (BMD-4) में कार्यरत ठेका श्रमिकों द्वारा गाली-गलौच और जान से मारने की धमकी देने की गंभीर घटना के बाद भी प्रबंधन और सुरक्षा विभाग ने आरोपियों पर नकेल कसने के बजाय उन्हें परोक्ष रूप से संरक्षण दे दिया। 50 मजदूरों की थाने में शिकायत और पुलिस द्वारा नामजद FIR दर्ज करने के बावजूद, आरोपियों के गेट-पास रद्द न करना सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

थाने पहुंची मजदूरों की भीड़

मामला 25 दिसंबर 2025 का है। दोपहर करीब 1:00 बजे बीएमडी-चार विभाग में ठेका श्रमिक दीनदयाल रघुवंशी और जौहरी ईवने ने साथी कर्मचारी युवराज भारती के साथ अभद्रता की और जान से मारने की धमकी दी। मामले ने तूल तब पकड़ा जब आरोपियों की दबंगई से परेशान होकर लगभग 50 ठेका श्रमिक एकजुट होकर सारनी थाना पहुंचे।

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पीड़ित युवराज भारती की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 27 दिसंबर 2025 को अपराध क्रमांक 0307/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS-2023) की धारा 351(1) (आपराधिक धमकी) और 352 (शांति भंग करने के लिए अपमान) के तहत मामला पंजीबद्ध किया।

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सुरक्षा विभाग की भूमिका: ‘रक्षक’ या ‘मूकदर्शक’?

नियमतः, एफआईआर (FIR) की प्रति कार्यपालन अभियंता (बीएमडी-4) और सुरक्षा विभाग को भेजी गई थी। पावर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) के सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार, यदि किसी श्रमिक पर प्लांट के भीतर आपराधिक कृत्य करने का मामला दर्ज होता है, तो उसका गेट-पास तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancel) किया जाना चाहिए ताकि अन्य कर्मचारियों और प्लांट की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

किंतु हैरानी की बात है कि सुरक्षा अधिकारी और संबंधित कार्यपालन अभियंता ने कड़ी कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों को महज 5 दिनों के लिए काम से निष्कासित कर मामले की “खानापूर्ति” कर दी। यह नरम रवैया साबित करता है कि अधिकारी या तो किसी दबाव में हैं या फिर आपराधिक तत्वों को संरक्षण दे रहे हैं।

आदतन अपराधी हैं आरोपी, पहले भी कर चुके हैं मारपीट

सूत्रों से मिली जानकारी और मजदूरों के आरोप ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि आरोपी दीनदयाल और जौहरी का यह पहला अपराध नहीं है। इन दोनों ने पूर्व में भी प्लांट परिसर के भीतर तीन अन्य कर्मचारियों के साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिया था। बावजूद इसके, सुरक्षा विभाग द्वारा बार-बार इन्हें अभयदान देना समझ से परे है। सवाल यह है कि क्या सुरक्षा विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?

मजदूरों में रोष: “किसकी शह पर चल रही गुंडागर्दी?”

प्लांट में कार्यरत अन्य श्रमिकों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है, “जब 50 मजदूरों की गवाही और पुलिस की FIR के बाद भी आरोपियों का गेट-पास रद्द नहीं हुआ, तो सामान्य मजदूर अपनी सुरक्षा की उम्मीद किससे करे?” आदतन अपराधियों को प्लांट में प्रवेश देना न केवल सुरक्षा में सेंध है, बल्कि यह वहां काम करने वाले हजारों ईमानदार कर्मचारियों की जान को जोखिम में डालना भी है।

इनका कहना है…

  • ठेका श्रमिक वाले मामले में कार्रवाई हो रही हैं, उनके इंजीनियर से बात हों गईहैं, हमारी और से लिखकर दें दिया हैं, संभवत आज कारवाईहो जाएंगी। इस मामले में उचित कार्रवाई किजाएंगी।

शरद राघव, मुख्य सुरक्षा अधिकारी सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी

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