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संगठन श्रम पदाधिकारी के ज्ञापन का ‘स्पिनिंग मिल्स मजदूर एकता यूनियन’ ने किया पुरजोर समर्थन, लेबर कोड्स को बताया ‘मजदूरों का डेथ वारंट’ – Madhya Pradesh Voice

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संगठन श्रम पदाधिकारी के ज्ञापन का ‘स्पिनिंग मिल्स मजदूर एकता यूनियन’ ने किया पुरजोर समर्थन, लेबर कोड्स को बताया ‘मजदूरों का डेथ वारंट’


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18/12/2025 8:50 AM Total Views: 388219

भोपाल। मंडीदीप रायसेन के श्रम पदाधिकारी द्वारा 16 दिसंबर को माननीया राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन के बाद अब श्रमिक संगठनों ने लामबंदी तेज कर दी है। स्पिनिंग मिल्स मजदूर एकता यूनियन, मध्य प्रदेश ने इस ज्ञापन का पूर्ण समर्थन करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूनियन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि चारों लेबर कोड्स वापस नहीं लिए गए, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।

चारों लेबर कोड्स: मजदूरों के भविष्य पर सीधा हमला

यूनियन के पदाधिकारियों ने बैठक कर केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित चार लेबर कोड्स—वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता, और व्यावसायिक सुरक्षा (OSH) संहिता—की कड़ी निंदा की। यूनियन का मानना है कि ये कानून मजदूरों को सुरक्षा देने के बजाय उन्हें बंधुआ मजदूरी की ओर धकेलेंगे।

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यूनियन ने काम के घंटों में वृद्धि: 8 घंटे की शिफ्ट को बढ़ाकर मजदूरों के शोषण का मार्ग प्रशस्त करना। हड़ताल पर पाबंदी: लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के संवैधानिक अधिकार को छीनना। आसान छंटनी: ‘हायर एंड फायर’ की नीति से रोजगार की सुरक्षा को पूरी तरह खत्म करना। सामाजिक सुरक्षा का अभाव: पीएफ और अन्य लाभों में कटौती के प्रावधान। जैसे कोड्स के खिलाफ मुख्य आपत्तियां दर्ज की हैं।

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“पूंजीपतियों की तिजोरी भरने में व्यस्त है सरकार”

बैठक के दौरान सीटू (CITU) पदाधिकारियों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार एक तरफ महंगाई को आसमान पर पहुंचा रही है, वहीं दूसरी ओर मजदूरों की मजदूरी में नाममात्र की वृद्धि कर रही है। यह स्पष्ट है कि नीतियां केवल कॉर्पोरेट घरानों और पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं।

अतिरिक्त महासचिव कुलदीप सिंह राजपूत का कड़ा प्रहार

इस अवसर पर स्पिनिंग मिल्स मजदूर एकता यूनियन के अतिरिक्त महासचिव कुलदीप सिंह राजपूत ने अपने संबोधन में सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने प्रभावशाली शब्दों में कहा: “सरकार यह भूल रही है कि देश की प्रगति का पहिया पूंजीपतियों की तिजोरी से नहीं, बल्कि मजदूरों के पसीने से चलता है। ये चार लेबर कोड्स कानून नहीं, बल्कि मेहनतकशों के अधिकारों का ‘डेथ वारंट’ हैं। हम चुपचाप बैठकर अपने हक का गला घोंटते हुए नहीं देख सकते। जब महंगाई रोजाना रॉकेट की तरह बढ़ रही है, तब मजदूरों की मजदूरी में चंद रुपयों की वृद्धि उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। हम अंतिम सांस तक इन काले कानूनों के खिलाफ लड़ेंगे।”

भविष्य की रणनीति और मांगें

स्पिनिंग मिल्स मजदूर एकता यूनियन ने प्रदेश के समस्त मेहनतकश मजदूरों से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने चारों श्रमिक विरोधी लेबर कोड्स को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। बढ़ती महंगाई के अनुपात में न्यूनतम मजदूरी में सम्मानजनक वृद्धि की जाए। ठेका प्रथा को समाप्त कर मजदूरों के स्थायी रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी जाए।

यूनियन ने साफ कर दिया है कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार अपनी दमनकारी नीतियों को वापस नहीं ले लेती।

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