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बुधनी के वर्धमान फैब्रिक्स में लापरवाही का नंगा नाच: दो मजदूरों के मौत के बाद भी नहीं खुली प्रबंधन की नींद , भविष्य में और अनहोनी की आशंका – Madhya Pradesh Voice

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बुधनी के वर्धमान फैब्रिक्स में लापरवाही का नंगा नाच: दो मजदूरों के मौत के बाद भी नहीं खुली प्रबंधन की नींद , भविष्य में और अनहोनी की आशंका


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29/10/2025 1:08 AM Total Views: 363157

भोपाल, सीहोर। “बुधनी स्थित वर्धमान फैब्रिक्स में 16 अक्टूबर को हुए भीषण हादसे ने मजदूरों के मन में प्रबंधन की लापरवाही को लेकर गहरा खौफ पैदा कर दिया है। इस घटना में जहाँ दो मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी, वहीं एक अन्य घायल हो गया। यह हादसा इस बात पर सवालिया निशान खड़ा करता है कि प्रबंधन अपनी कार्य को करवाने के लिए मशीनरी का उपयोग करने के बजाय, जब मजदूरों से ही ऐसे खतरनाक कार्य करवा रहा है, तो फिर इन बेगुनाहों की जान की कीमत क्या है?

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चेतावनी अनसुनी, जान की कीमत पर मिली ‘सहायता’

स्पिनिंग मिल्स मजदूर एकता यूनियन ने इस घटना से पहले भी कई बार प्रबंधन को उनकी लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता के बारे में अवगत कराया था। यूनियन द्वारा बार-बार सुरक्षा मानकों को पूरा करने की गुहार लगाई गई थी, लेकिन प्रबंधन की कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। नतीजतन, 16 अक्टूबर को हुई इस भीषण दुर्घटना में दो निर्दोष मजदूर कुंदन अंसारी पिता रईस (49 वर्ष), निवासी देवरिया, उत्तर प्रदेश तथा संदेश कुमार पिता रघुनाथ प्रसाद कुशवाह (37 वर्ष), निवासी सिवान, बिहार के रूप में हुई है। घायल का नाम दिलनवाज पिता सहमद (19 वर्ष), निवासी गोपालगंज, बिहार को अपने प्राण गंवाने पड़े। यह स्पष्ट है कि जिस शेड निर्माण कार्य में 7 टन वजनीय लोहे की प्लेट को उठाने के लिए क्रेन का उपयोग होना था, उन पर सीधे मजदूरों से काम लिया जा रहा था, जो कि एक जानलेवा लापरवाही थी। हालांकि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह काम ठेकेदार के अधीन था और मौके पर न तो पर्याप्त सुरक्षा उपकरण थे और न ही किसी इंजीनियर की देखरेख थी।

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300-500 नहीं, 50,000 की ‘सहायता’ और 10 लाख का मुआवज़ा?

दुर्घटना के बाद, श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से मृतक परिवारों को अंत्येष्टि सहायता के तौर पर 50-50 हजार और 10-10 लाख की सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की। हालाँकि, यह सहायता राशि एक भयावह सच की ओर इशारा करती है कि एक मजदूर की जान की कीमत सिर्फ इतनी है? यह सवाल आज भी खड़ा है कि क्या कंपनी प्रबंधन की इस जानलेवा लापरवाही की जांच होगी या सिर्फ़ मुआवज़े की घोषणा से मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?

‘वही ढाक के तीन पात’ रवैया जारी, भविष्य में और बड़ी अनहोनी का खतरा

चिंताजनक बात यह है कि 16 अक्टूबर की घटना के बावजूद, कंपनी प्रबंधन सुरक्षा को लेकर अभी भी सजगता नहीं दिखा रहा है। प्रबंधन का वही रवैया पूर्व की भांति ही बना हुआ है, जिसके चलते भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। यह स्थिति “वही ढाक के तीन पात” वाली कहावत को चरितार्थ करती है, जहाँ आए दिन मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।

श्रम विभाग और मंत्रालय कब होंगे सख्त❓

यह घटना श्रम विभाग और श्रम मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती है। क्या वे तब तक खामोश रहेंगे जब तक कि और जानें न चली जाएँ? क्या मृतक परिवारों को दी जाने वाली सहायता राशि ही न्याय का पैमाना है? या फिर श्रम मंत्रालय इन कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं रोकी जा सकें?

वर्धमान फैब्रिक्स में हुई यह त्रासदी केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक गंभीर लापरवाही का परिणाम है। मजदूरों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए, और प्रबंधन को इस जिम्मेदारी का अहसास कराना अत्यंत आवश्यक है। जब तक श्रम विभाग और मंत्रालय ऐसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक मजदूरों को अपनी जान गँवाने का सिलसिला यूँ ही जारी रहेगा।

इनका कहना है :—

  • मृत्यु प्रमाण पत्र अभी आया नहीं है, प्रमाण पत्र के आते ही वैद्य उत्तराधिकारी को श्रमिक क्षतिपूर्ति राशि (कंपनसेशन राशि) कोर्ट के माध्यम से मृतक के परिजनों को सौंप दी जाएगी, ठेकेदार की ओर से 50 हजार की तात्कालिक सहायता राशि मृतक के परिजनों को दिलवाया जा चुका है। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर द्वारा जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी जो भी निर्णय होगा उसी आधार पर फैक्ट्री प्रबंधन पर कार्रवाई की जाएगी।

एस एन संगुले, लेबर ऑफिसर, सीहोर

  • इस घटना के पहले भी कई मजदूर की शिकायत पर वर्धमान कंपनी के प्रबंधन को फैक्ट्री में सेफ्टी को लेकर हो रही लापरवाही के संबंध में अवगत कराया गया था। किंतु प्रबंधन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए कंपनी द्वारा सुरक्षा मानकों को लेकर अक्सर लापरवाही भारती जाती है। जिसका नतीजा दो ठेका श्रमिकों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। ऐसा दोबारा न हो कंपनी प्रबंधन को संगठन द्वारा चेतावनी दी जा चुकी है

कुलदीप सिंह राजपूत, अति. महासचिव, स्पिनिंग मिल मजदूर एकता यूनियन

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