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सारणी में आदिवासी श्रमिकों का खुला शोषण: आदिवासी विकास परिषद् ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, उचित वेतनमान व अधिकारों की मांग – Madhya Pradesh Voice

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सारणी में आदिवासी श्रमिकों का खुला शोषण: आदिवासी विकास परिषद् ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, उचित वेतनमान व अधिकारों की मांग


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25/10/2025 6:47 PM Total Views: 492657

सारनी। सारनी का आदिवासी अंचल इन दिनों अपने ही श्रमिकों के शोषण का गवाह बन रहा है। सतपुड़ा प्लांट में कार्यरत स्थानीय आदिवासी ठेका श्रमिकों और अन्य मजदूरों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज़ बुलंद हुई है। आदिवासी विकास परिषद् ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर जिला कलेक्टर के नाम तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें इन श्रमिकों के शोषण को बंद करने और उन्हें शासकीय दर के अनुसार निर्धारित वेतनमान दिए जाने की पुरजोर मांग की गई है।

शोषण के गंभीर आरोप और खामियां:

घोड़ा डोंगरी आदिवासी विकास परिषद के उपाध्यक्ष और बाकुड पंचायत के सरपंच, भैया लाल बैठे ने ज्ञापन सौंपते समय विस्तार से बताया कि सारणी थर्मल पावर हाउस में कार्यरत ठेका श्रमिकों का लंबे समय से शोषण हो रहा है। उन्होंने कई गंभीर खामियों को उजागर किया:

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• वेतनमान में हेरफेर: श्रमिकों को कुशल (skilled) कैटेगरी में रखकर अर्ध-कुशल (semi-skilled) का वेतनमान दिया जा रहा है, जो कि नियमों का घोर उल्लंघन है।

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• काम के दिनों में कटौती: हाउसकीपिंग में काम करने वाले लगभग 125 श्रमिकों को मात्र ₹300 की दर से प्रति माह केवल 18 दिन का ही काम दिया जा रहा है, जबकि शासकीय दर ₹467 है और उन्हें महीने के 26 दिन काम मिलना चाहिए।

• एरियर और बोनस से वंचित: न्याय पाने के लिए न्यायालय में संघर्ष करने वाले श्रमिकों को भी एरियर (बकाया राशि) का भुगतान नहीं किया गया है। इसके अलावा, कई ठेका श्रमिकों को शासन की गाइडलाइन के अनुरूप एरियर और बोनस अब तक नहीं मिला है, जिसके कारण कई श्रमिकों की दिवाली भी फीकी रह गई।

• बाग-बगीचों में भी शोषण: बाग-बगीचों के ठेकों में भी स्थानीय आदिवासी ठेका श्रमिकों का शोषण जारी है। उन्हें मात्र ₹310 देकर महीने में 18 या 19 दिन ही काम दिया जा रहा है।

• वाहन चालकों और परिचालकों का शोषण: वाहन चालकों और परिचालकों को भी कम वेतनमान दिया जा रहा है। इनमें से कईयों के साथ यह भी हो रहा है कि ठेकेदार द्वारा पेमेंट अकाउंट में देकर वापस ले लिया जाता है, जो कि गंभीर आर्थिक अपराध है।

• अवैध मेडिकल सर्टिफिकेट: ठेका श्रमिकों के मेडिकल सर्टिफिकेट भी एक ही आवास में जांच कराकर बना लिए जाते हैं, जो कि नियमों के विरुद्ध है और श्रमिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।

गंभीर चेतावनी और आगामी आंदोलन की रूपरेखा:

श्री बैठे ने इस पूरे मामले को ठेका मजदूरों के शोषण की पराकाष्ठा बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन गंभीर मुद्दों का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ, तो आदिवासी विकास परिषद् उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी। उन्होंने पुतला दहन और व्यापक जन आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

इस अवसर पर ज्ञापन सौंपने वालों में जनपद पंचायत घोड़ाडोंगरी के पूर्व उपाध्यक्ष एवं सलैया ग्राम पंचायत के सरपंच मिश्रीलाल परतें, विक्रमपुर ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती यशोदा मसकोले, धसेड़ ग्राम पंचायत सरपंच शांति गणेश उईके, खेरवानी ग्राम पंचायत के सरपंच रामदयाल वटके के अलावा आदिवासी नेता लालमन काकोड़िया, तुलसी उईके, सुनहरी यादव, सूरज धुर्वे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इन सभी ने मिलकर श्रमिकों के हकों की लड़ाई को समर्थन दिया है।

क्या है इनका कहना

कलेक्टर महोदय के नाम आदिवासी विकास परिषद ने सतपुड़ा प्लांट में कार्यरत आदिवासी श्रमिकों वह अन्य श्रमिकों के शोषण से जुड़ी मांगों को लेकर ज्ञापन सोपा है वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर श्रमिक हित में जल्द कार्रवाई की जाएगी

संतोष पिथोरिया, तहसीलदार, सारणी घोडोंगरी डोंगरी क्षेत्र

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