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पी.एल.एस. स्कूल की बस फिर हुई खराब : बच्चों से धक्का लगवाकर बस चालू करने की कोशिश, सुरक्षा मानकों की खुली पोल – Madhya Pradesh Voice

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पी.एल.एस. स्कूल की बस फिर हुई खराब : बच्चों से धक्का लगवाकर बस चालू करने की कोशिश, सुरक्षा मानकों की खुली पोल


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10/10/2025 11:41 PM Total Views: 463092

बैतूल/सारनी। क्षेत्र में एक बार फिर पी.एल.एस. इंटरनेशनल स्कूल, सुखाढाना की बस ने स्कूल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर कर दिया है। कुछ दिन पहले ही इस स्कूल की बस की स्टीयरिंग फेल होने से 48 बच्चों की जान जोखिम में पड़ गई थी, लेकिन लगता है कि उस घटना से स्कूल प्रबंधन ने कोई सबक नहीं लिया। आज फिर उसी स्कूल की बस सड़क पर ब्रेकडाउन हो गई, जिससे बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

बच्चों से लगवाया गया धक्का, फिर भी नहीं चली बस

गुरुवार की सुबह बच्चों को स्कूल ले जाने वाली बस क्रमांक एमपी 48 पी 0389 अचानक बीच रास्ते में बंद हो गई। ड्राइवर ने कई बार स्टार्ट करने की कोशिश की, पर बस चालू नहीं हुई। इसके बाद बच्चों से ही बस को धक्का लगवाने की कोशिश की गई, लेकिन गाड़ी फिर भी चालू नहीं हुई। कई घंटे तक ड्राइवरों ने मिलकर बस को चालू करने के प्रयास किए, पर कोई सफलता नहीं मिली। इस वजह से बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हुआ और वे स्कूल देर से पहुंचे।

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क्या पी.एल.एस. स्कूल कंडम बसों का उपयोग कर रहा है?

यह घटना इस ओर संकेत करती है कि स्कूल प्रबंधन पुरानी और तकनीकी रूप से कमजोर बसों का उपयोग कर रहा है। कुछ दिन पहले ही जिस बस की स्टीयरिंग फेल होने से 48 बच्चों की जान बाल-बाल बची थी, उसी बस को दोबारा सड़क पर उतारना गंभीर लापरवाही है। अभिभावकों का कहना है कि अगर स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा को लेकर इतना उदासीन रहेगा, तो किसी दिन यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

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बस में नहीं हैं सुरक्षा के अनिवार्य उपकरण

जांच में पाया गया है कि बस में ना फर्स्ट एड बॉक्स है, ना फायर एक्सटिंग्विशर, और ना ही आगे-पीछे कैमरे लगे हैं, जबकि सरकार द्वारा जारी स्कूल बसों के दिशा-निर्देशों के अनुसार ये सभी सुविधाएं अनिवार्य हैं। इसके बावजूद बस सड़कों पर दौड़ रही है, जिससे यह सवाल उठता है कि आरटीओ अधिकारी ऐसी बसों को फिटनेस सर्टिफिकेट कैसे जारी कर रहे हैं? क्या केवल कागजों में जांच कर खानापूर्ति कर दी जाती है?

अभिभावकों और नागरिकों में आक्रोश

लगातार दो घटनाओं ने अभिभावकों को चिंतित कर दिया है। वे पूछ रहे हैं कि जब स्कूल फीस वसूली में इतनी सख्ती दिखाता है, तो सुरक्षा मानकों पर इतनी ढिलाई क्यों? अभिभावकों का कहना है कि यदि प्रशासन ने अब भी इस पर ध्यान नहीं दिया, तो वे स्कूल प्रबंधन और आरटीओ विभाग के खिलाफ संयुक्त रूप से कार्रवाई की मांग करेंगे।

बड़ा सवाल — जिम्मेदारी कौन लेगा?

यह मामला अब केवल एक बस की खराबी का नहीं, बल्कि प्रबंधन, परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग की जवाबदेही का है। यदि भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो जिम्मेदार कौन होगा — स्कूल संचालक, आरटीओ अधिकारी या प्रशासन ? बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूल और संबंधित विभाग दोनों ही लापरवाह हैं।

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि पी.एल.एस. स्कूल की सभी बसों की फिटनेस जांच कराई जाए, सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और कंडम बसों को तुरंत सेवा से हटाया जाए।

साथ ही यह भी आवश्यक है कि आरटीओ अधिकारी जवाब दें कि कैसे ऐसी बसों को फिटनेस प्रमाणपत्र दिया गया।

यह मामला केवल एक स्कूल की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा व्यवस्था पर एक सवालिया निशान है।

क्या बच्चों की सुरक्षा अब कागजी औपचारिकताओं में खो गई है?

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