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राष्ट्रव्यापी हड़ताल का जोरदार असर: कोयला खदानें ठप, सरकारी कामकाज थमा, कर्मचारियों ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा – Madhya Pradesh Voice

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राष्ट्रव्यापी हड़ताल का जोरदार असर: कोयला खदानें ठप, सरकारी कामकाज थमा, कर्मचारियों ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा


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09/07/2025 8:51 PM Total Views: 386866

प्रवीर कुमार, 9425402406

सारणी। केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का बैतूल जिले में बुधवार को जबरदस्त असर देखने को मिला। पाथाखेड़ा के कोयला क्षेत्र में तीनों भूमिगत खदानें पूरी तरह से बंद रहीं, जबकि सरकारी कार्यालयों में कामकाज ठप रहा। हजारों कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

पाथाखेड़ा की तवा वन, तवा टू और छतरपुर वन खदानों में सुबह 5 बजे से ही सन्नाटा पसर गया। श्रमिक संगठनों के संयुक्त मोर्चे ने खदानों के बाहर मोर्चा संभाल लिया और किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को खदान परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया। तवा परियोजना पर संयुक्त मोर्चा और छतरपुर खदान पर एटक, सीटू, एसएमएस व इंटक के प्रतिनिधि तैनात रहे।

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वेकोलि की खदानों और उससे जुड़ी वर्कशॉप, अस्पताल सहित विभिन्न विभागों में कार्यरत लगभग 2800 कर्मचारियों और अधिकारियों ने हड़ताल में हिस्सा लिया। इस दौरान पूरे क्षेत्र में पुलिस और सुरक्षा बल तैनात रहे, लेकिन स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण रही।

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बैतूल शहर में भी हड़ताल का दिखा व्यापक असर

बैतूल शहर में भी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। पीएनबी बैंक के सामने 10 केंद्रीय संगठनों के बैनर तले विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। बैंकिंग, बीमा, डाक, परिवहन, बिजली, बीएसएनएल, आयकर, आंगनवाड़ी, मध्यान्ह भोजन योजना, भवन निर्माण और खेत-खलिहान से जुड़े हजारों कर्मचारियों ने इस प्रदर्शन में भाग लिया।

हड़ताल के कारण बैंकों में लेन-देन ठप रहा, डाकघर की सेवाएं बाधित रहीं और सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति बेहद कम रही। कर्मचारियों ने “लेबर कोड्स हटाओ”, “पुरानी पेंशन बहाल करो” जैसे नारे लगाए। महिला कर्मचारियों ने भी इस प्रदर्शन में सक्रिय रूप से भाग लिया।

कोयला खनन के निजीकरण का विरोध, पुरानी पेंशन की बहाली की मांग

हड़ताल कर रहे कर्मचारियों की प्रमुख मांगें कोयला खनन का निजीकरण बंद करना, ठेका कर्मचारियों को नियमित करना, सभी को सामाजिक सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना और पुरानी पेंशन योजना को बहाल करना है।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है, तो भविष्य में और उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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