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सड़क सुरक्षा की बलि: अधिवक्ताओं की दुर्घटना में हुई मौत ने उजागर की प्रशासन की अनदेखी, MPRDC सवालों के घेरे में ! – Madhya Pradesh Voice

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सड़क सुरक्षा की बलि: अधिवक्ताओं की दुर्घटना में हुई मौत ने उजागर की प्रशासन की अनदेखी, MPRDC सवालों के घेरे में !


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23/06/2025 8:55 PM Total Views: 363495

बैतूल/सारणी। रविवार की रात राजडोह के पास हुई एक हृदयविदारक दुर्घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। दमुआ से लौट रहे सारणी और घोड़ाडोंगरी के अधिवक्ताओं का समूह एक अंधे मोड़ पर सड़क से उतरकर गहरे गड्ढे में जा गिरा। इस भीषण हादसे में सलैया निवासी अधिवक्ता सुरेश सुमन की उपचार के दौरान मौत हो गई, और एक सारणी नवासी अधिवक्ता बसंता साकरे को सिर पर गंभीर चोट आने की वजह से नागपुर रेफर कर दिए गए बकि अन्य अधिवक्ता भी गंभीर रूप से घायल हैं।

इस घटना ने सड़क सुरक्षा के प्रति प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया है। दुर्घटनास्थल राजडोह के पास, एक खतरनाक मोड़ है जहाँ पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। बावजूद इसके, यहाँ सड़क के किनारे क्रैश बैरियर नहीं लगाए गए थे, जिसके कारण वाहन सीधे गहरे गड्ढे में जा गिरा। यदि क्रैश बैरियर होते, तो शायद इस दुर्घटना को टाला जा सकता था या कम से कम जानहानि को रोका जा सकता था।

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बैतूल-परासिया मुख्य मार्ग स्टेट हाईवे 43 के घाट सेक्शन मौत का मार्ग बनता जा रहा है जहां पर अधिकांश जगहों में क्रैश बैरियर और यातायात संकेत कई जगहों पर उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते पहले भी कई दोपहिया और चार पहिया वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो होकर गहरे गड्ढे में जा गिरे है। लेकिन, प्रशासन द्वारा दुर्घटना संभावित इस घाट सेक्शन पर किसी भी तरह की सुरक्षा मानकों को लेकर न तो कोई सर्वे किया जा रहा है और न ही कोई बेहतर कदम उठाए जा रहा है।

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करोड़ों-अरबों की लागत से बने इस स्टेट हाईवे 43 का निर्माण दिलीप बिल्डकॉन द्वारा किया गया है। लेकिन, निर्माण कंपनी की लापरवाही और घटिया निर्माण कार्य सड़क सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ा रही है। सवाल यह उठता है कि जब सड़क सुरक्षा इतनी महत्वपूर्ण है, तो क्रैश बैरियर और यातायात सांकेतिक चिन्ह क्यों नहीं लगाए गए?

इसके अलावा, सड़क की सुरक्षा और मरम्मत के लिए एमपीआरडीसी (MPRDC) द्वारा टोल टैक्स वसूला जाता है। बावजूद इसके, घाट सेक्शन पर सुरक्षा मानकों की कमी एमपीआरडीसी के निढालपन को दर्शाती है। टोल टैक्स के पैसे कहां जा रहे हैं, जब सड़कों पर सुरक्षा के इंतजाम तक नहीं हैं?

विडंबना यह है कि प्रशासन दुर्घटना संभावित इस घाट सेक्शन पर सुरक्षा मानकों को लेकर कोई गंभीर प्रयास नहीं कर रहा है। न तो कोई सर्वे किया जा रहा है और न ही कोई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को इस बारे में अवगत कराया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस उदासीनता का परिणाम यह है कि दुर्घटनाओं का क्रम लगातार बढ़ता जा रहा है और अब एक अधिवक्ता को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

यह दुर्घटना एक गंभीर सवाल खड़ा करती है: क्या प्रशासन सड़क सुरक्षा को गंभीरता से लेगा या यूं ही निर्दोष लोग हादसों का शिकार होते रहेंगे? इस घटना के बाद प्रशासन पर भारी दबाव है कि वह तत्काल दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान करे और वहां क्रैश बैरियर लगाए। इसके साथ ही, सड़कों की मरम्मत और यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करे।

अधिवक्ता सुरेश सुमन की असामयिक मृत्यु एक चेतावनी है। यदि प्रशासन ने अभी भी सड़क सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती, तो भविष्य में और भी जानलेवा हादसे हो सकते हैं। प्रशासन को अब नींद से जागना होगा और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

📌 उक्त विषयों को लेकर चर्चा के लिए एमपीआरडीसी (MPRDC) बैतूल परासिया राज्य मार्ग निरीक्षण अधिकारी राजकुमार नागले से 9479472262 संपर्क करने का प्रयास किया गया किंतु उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया।

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