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महिला बाल विकास में भूचाल! ‘लापरवाह’ संजय उईके पर गिरी ‘गाज’: आज जवाब का आखिरी दिन, क्या खुलेगी फर्जीवाड़े की पोल?  – Madhya Pradesh Voice

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महिला बाल विकास में भूचाल! ‘लापरवाह’ संजय उईके पर गिरी ‘गाज’: आज जवाब का आखिरी दिन, क्या खुलेगी फर्जीवाड़े की पोल? 


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31/05/2025 8:51 AM Total Views: 386471

बैतूल/सारनी। महिला बाल विकास परियोजना सारणी में पदस्थ सहायक ग्रेड 3 कर्मचारी संजय उईके पर आखिरकार जिला मुख्यालय से गाज गिर गई है। गंभीर लापरवाही के आरोपों के चलते उन्हें जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी कर आज 30 मई तक जवाब मांगा गया है। यह कार्रवाई हमारे द्वारा 23 मई को प्रकाशित प्रमुख खबर (कलेक्टर साहब महिला बाल विकास के संजय उईके सार्थक ऐप पर जिला अधिकारी को गुमराह कर रहे) का सीधा परिणाम मानी जा रही है, जिसने संजय उईके की कार्यशैली और अनियमितताओं को प्रमुखता से उजागर किया था।

नोटिस में गंभीर आरोप और सख्त चेतावनी:

जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला बाल विकास ने 27 मई को पत्र क्रमांक/मबावि/स्थापना/2104 जारी करते हुए संजय उईके को कड़ी फटकार लगाई है और उन्हें तीन दिन के भीतर तथ्यात्मक जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। नोटिस में स्पष्ट उल्लेख है कि “दैनिक समाचार पत्रों में आपके विरुद्ध कार्यालय में उपस्थिति लगाकर अनुपस्थित रहने, सार्थक एप पर उपस्थिति लगाकर कार्यालय से अनुपस्थित रहने, नियमानुसार विभागीय कार्यों का संपादन न करने तथा कार्यालयीन समय पर शासकीय कार्यों को न कर अपने निजी कार्यों को करने, विभिन्न विभागीय योजनाओं में हितग्राहियों से उचित व्यवहार न करने संबंधी आदि अनेक शिकायती समाचार प्रकाशित प्राप्त हुए हैं।”

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नोटिस में आगे कहा गया है कि “यह प्रतीत होता है कि आपके द्वारा नियमानुसार अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया जा रहा है, यह कृत्य दर्शाता है कि आप पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाह हैं एवं वरिष्ठ पदाधिकारियों/प्राधिकारियों के निर्देशों का अनुपालन न करना प्रदर्शित करता है कि आप अपने कर्तव्य के प्रति उदासीन हैं।” अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि उक्त कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए उत्तरदायी बनाता है।

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संजय उईके को 30 मई तक नियंत्रणकर्ता अधिकारी के माध्यम से अपना जवाब प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया गया है। नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि “नियत समयावधि में जवाब प्राप्त न होने या जवाब तुष्टिपरक न होने की दशा में आपके विरुद्ध नियमानुसार एक पक्षीय कार्यवाही की जावेगी, जिसके लिए आप स्वयं व्यक्तिशः जिम्मेदार होंगे।”

संजय उईके की ‘लापरवाही’ का काला चिट्ठा: एक नजर में:

दरअसल, महिला बाल विकास परियोजना सारणी में पदस्थ सहायक ग्रेड 3 संजय उईके पर गंभीर आरोपों की लंबी फेहरिस्त है, जो उनकी कार्यप्रणाली में व्याप्त अनियमितताओं को उजागर करती है:

‘स्मार्ट’ फर्जी हाजिरी:

आरोप है कि संजय उईके सार्थक ऐप पर हाजिरी लगाकर कार्यस्थल से गायब होकर जिला कार्यक्रम एवं कलेक्टर तक को गुमराह करते थे। वह रोजाना सुबह 10 बजे सार्थक ऐप पर अपनी हाजिरी दर्ज करते और तुरंत ही अपना कार्यस्थल छोड़कर चले जाते थे। अधिकारियों को लोकेशन के आधार पर गुमराह करने के लिए वह अपना मोबाइल या तो अपने कार्यालय के बैग में छोड़ देते थे या किसी अन्य सहयोगी कर्मचारी को देकर बाहर निकल जाते थे, जिससे ऐप में उनकी उपस्थिति कार्यालय में ही दिखाई देती रहे।

कर्तव्य पर निजी कार्य को प्राथमिकता:

कार्यालय में उपस्थित न रहते हुए भी वह शासकीय समय में अपने निजी कार्यों में व्यस्त रहते थे। आरोप है कि कंप्यूटर बंद कर वह फिल्म प्रोड्यूसर से लंबी-लंबी बातें करते थे। यह उनके कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही को दर्शाता है।

हितग्राहियों से दुर्व्यवहार:

अगर इस दौरान कोई गरीब हितग्राही किसी सरकारी योजना की जानकारी लेने आ जाए तो उसके साथ दुर्व्यवहार किया जाता और ‘कंप्यूटर खराब है’ जैसे बहाने बनाकर चलता कर दिया जाता था। यह दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने की बजाय उन्हें परेशान किया जा रहा था।

दफ्तर में ‘राजा महाराजा’ वाला अंदाज:

एक चौंकाने वाली घटना 6 मई, 2025 (संभवतः 2024 की टाइपिंग त्रुटि) की बताई गई है, जब दोपहर 11:46 बजे की एक तस्वीर में संजय उईके को कंप्यूटर बंद कर, मॉनिटर पर दोनों पैर रखकर ‘राजा महाराजा’ की तरह सरकारी कार्यालय में मोबाइल चलाते हुए साफ देखा जा सकता है। ऐसे नजारे सारणी कार्यालय में कथित तौर पर रोज देखने को मिलते हैं, जो सरकारी कार्यालयों में अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा है।

सामुदायिक आड़ में मनमानी ?:

यह भी आरोप है कि परियोजना अधिकारी के उन्हीं के समाज से होने के कारण उन्हें कोई रोकने-टोकने वाला नहीं था, जिसके चलते उनकी मनमानी चरम पर थी। इस गंभीर लापरवाही से सरकारी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा था और सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं गरीब और जरूरतमंद जनता तक नहीं पहुंच पा रही थीं, जिससे सरकार की छवि भी धूमिल हो रही थी।

अब क्या होगा ? सस्पेंशन या बर्खास्तगी तय !

ऐसी गंभीर स्थिति को देखते हुए, यदि इस मामले में निष्पक्ष और कड़ी कार्यवाही होती है, तो लापरवाह कर्मी संजय उईके पर कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप में सस्पेंड या टर्मिनेट की कार्यवाही होना लगभग तय माना जा रहा है। यह मामला अन्य लापरवाह कर्मचारियों के लिए एक कड़ा संदेश भी देगा। इस संबंध में जिला कार्यक्रम अधिकारी से उनके दूरभाष नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका नंबर आउट ऑफ कवरेज एरिया बता रहा था। अब देखना यह है कि आज जवाब के आखिरी दिन संजय उईके क्या तर्क प्रस्तुत करते हैं और उनके खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई की जाती है।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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