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बैतूल के जेएच कॉलेज में 1.62 करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला, पूर्व प्राचार्यों पर गिरी गाज! – Madhya Pradesh Voice

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बैतूल के जेएच कॉलेज में 1.62 करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला, पूर्व प्राचार्यों पर गिरी गाज!


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23/12/2024 12:11 AM Total Views: 363463

बैतूल। बैतूल के जेएच कॉलेज में 1 करोड़ 62 लाख रुपए की छात्रवृत्ति से जुड़ी धोखाधड़ी का मामला दिन-ब-दिन गरमाता जा रहा है। पुलिस ने रविवार को इस घोटाले में शामिल कॉलेज के पूर्व प्राचार्यों को भी आरोपित किया है। दिलचस्प यह है कि इनमें से एक प्राचार्य खुद इसी मामले की फरियादी थी!

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भंडाफोड़ का कारण

गंज पुलिस के अधिकारी अरविंद कुमरे के मुताबिक, कॉलेज की पूर्व प्राचार्य विजेता चौबे ने पिछले साल 17 दिसंबर को तीन कर्मचारियों पर छात्रवृत्ति घोटाले की शिकायत की थी। इस एफआईआर के बाद से जांच में तेजी आई और आरोपियों की परतें खुलने लगीं। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर विजेता चौबे और पूर्व प्राचार्य राकेश कुमार तिवारी को भी आरोपी बना दिया गया है।

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जांच के नतीजे

17 दिसंबर को दर्ज की गई एफआईआर में कंप्यूटर ऑपरेटर दीपेश यारिया, लिपिक सहायक प्रकरणा बजार, और रिंकू पाटिल पर विभिन्न वित्तीय धारा के तहत आरोप लगाया गया है। कहा जा रहा है कि ये सभी लोग “गांव की बेटी योजना” के तहत मिलने वाली सरकारी राशि को फर्जी खातों में ट्रांसफर करते थे। जांच में 95 ऐसे फर्जी खाते भी सामने आए हैं।

घोटाला किसका?

इस घोटाले की गंभीरता का पता तब चला जब एजी एमपी ब्वालियर ने बैतूल कलेक्टर और प्राचार्य को एक पत्र लिखा। इसके बाद प्रिंसिपल ने उन कमरों को सील करवा दिया, जहां योजना संबंधित दस्तावेज रखे गए थे। प्रशासन की जांच में 1.62 करोड़ का यह घोटाला उजागर हुआ, जिसमें प्रतिभा किरण योजना के 17 लाख रुपए का हेरफेर भी शामिल है।

गांव की बेटी योजना का महत्व

गांव की बेटी योजना के तहत 12वीं कक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने वाली बालिकाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। एक छात्रा को 10 महीने तक हर माह 500 रुपए मिलते हैं। आरोपियों पर यह आरोप है कि इस राशि में व्यापक पैमाने पर हेरफेर किए गए हैं, जिससे कई छात्रों का हक मारा गया।

आगे की कार्रवाई

इस मामले में बैतूल कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की है, जिसमें ट्रेजरी अधिकारी अरुण वर्मा भी शामिल हैं। अब देखना होगा कि इस घोटाले के और क्या-क्या राज खुलते हैं और संबंधित आरोपियों को कितना सख्त दंड मिलता है।

यह घोटाला न केवल शैक्षणिक जगत को बल्कि समाज को भी एक गंभीर संदेश देता है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जिम्मेदारी का पालन अत्यंत आवश्यक है। बैतूल में यह मामला अब न केवल चर्चा का विषय बन गया है बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

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