नमस्कार मध्यप्रदेश वॉइस न्यूज पोर्टल मे आपका स्वागत हैं, खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे  7489579303, 👉बैतूल जिले के हर तहसील में संवाददाता चाहिए। 📞 संपर्क करें।
केंद्र सरकार ने वैवाहिक दुष्कर्म पर सुप्रीम कोर्ट में दायर किया हलफनामा, दूरगामी सामाजिक और कानूनी प्रभाव की चेतावनी – Madhya Pradesh Voice

Madhya Pradesh Voice

Latest Online Breaking News

केंद्र सरकार ने वैवाहिक दुष्कर्म पर सुप्रीम कोर्ट में दायर किया हलफनामा, दूरगामी सामाजिक और कानूनी प्रभाव की चेतावनी


WhatsApp Icon

03/10/2024 8:20 PM Total Views: 386708

न्यूज डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अगर किसी पति का अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाना दुष्कर्म के रूप में दंडनीय कर दिया गया, तो इससे दांपत्य जीवन पर गंभीर असर पड़ सकता है। सरकार ने वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध बनाने की मांग करने वाली कई याचिकाओं का विरोध करते हुए एक हलफनामा दायर किया है। शीर्ष कोर्ट इस मामले में तय करेगा कि क्या एक पति को अपनी पत्नी के साथ जबरन यौन संबंध बनाने पर दंडित किया जा सकता है, अगर वह नाबालिग नहीं है।

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 के एक विशेष नियम अपवाद-2 के अनुसार, यदि पत्नी नाबालिग नहीं है, तो पति का उसके साथ यौन संबंध बनाना दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। नए कानून के तहत भी धारा 63 के अपवाद 2 में यह स्पष्ट किया गया है कि पति का पत्नी के साथ यौन संबंध बनाना दुष्कर्म नहीं है।

ताजा खबरों को देखने के लिए , यहाँ क्लिक करके हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें

केंद्र ने हलफनामे में कहा कि यदि इस अपवाद को असंवैधानिक मानकर रद्द किया गया, तो इसका विवाह संस्था (शादी के रिश्ते) पर गहरा असर होगा। सरकार ने आगाह किया कि इसके दांपत्य जीवन में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं और रिश्ते में भारी अस्थिरता आ सकती है। इसने कहा कि तेजी से बदले सामाजिक और पारिवारिक ढांचे में नए प्रावधानों का दुरुपयोग भी संभव, क्योंकि यह साबित करना मुश्किल हो सकता है कि (यौन संबंध बनाने में) सहमति थी या नहीं।

Read Our Photo Story
यहाँ क्लिक करके हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

केंद्र ने कहा कि इस मुद्द पर सही फैसला लेने के लिए सभी राज्यों के साथ व्यापक चर्चा की जरूरत है, क्योंकि यह मामला समाज पर सीधा असर डाल सकता है। सरकारक ने यह भी स्पष्ट कहा कि विवाह में महिला की सहमति का उल्लंघन अवैध और दंडनीय होना चाहिए। लेकिन विवाह के भीतर इस तरह के उल्लंघनों के परिणाम बाहरी संबंधों से भिन्न होते हैं।

केंद्र ने अदालत को बताया कि संसद ने विवाह के संबंध में सहमति की सुरक्षा के लिए विभिन्न उपाय किए हैं। अगर संसद मानती है कि विवाह संस्था के संरक्षण के लिए इस अपवाद को बनाए रखना जरूरी है, तो अदालत को इसे रद्द नहीं करना चाहिए। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में एक पीठ कर रही है। पीठ इस मुद्दे पर कई याचिकाओं पर विचार कर रही है।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


लाइव कैलेंडर

April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930