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एनजीटी की रोक हटते ही चोपना में रेत माफिया बेखौफ: वैध खदान छोड़ जंगल, कॉर्पोरेशन और श्मशान घाट की नदियों का कर रहे ‘चीरहरण’ – Madhya Pradesh Voice

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एनजीटी की रोक हटते ही चोपना में रेत माफिया बेखौफ: वैध खदान छोड़ जंगल, कॉर्पोरेशन और श्मशान घाट की नदियों का कर रहे ‘चीरहरण’


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27/10/2026 11:36 PM Total Views: 497442

डब्ल्यूसीएल और सारणी के नवनिर्मित प्लांट में डंपरों से अवैध रेत खपाने की बड़ी साजिश; नीलगढ़ के फॉरेस्ट बीट अधिकारी की मिलीभगत से शासन और कंपनी को लग रहा लाखों का चूना

बैतूल/सारणी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रोक हटते ही चोपना क्षेत्र में बदनाम हो चुके पुराने रेत माफिया एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। इस बार रेत के इस काले कारोबार का तरीका और ठिकाना दोनों बदल दिए गए हैं। कम बारिश के चलते गांधीग्राम की वैध रेत खदान में रेत की पर्याप्त मात्रा न होने के कारण माफियाओं ने अब फॉरेस्ट और कॉर्पोरेशन की भूमि, नीलगढ़ के जंगल और यहां तक कि श्मशान घाट के पास बहने वाली नदियों व नालों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। अवैध रूप से उत्खनन की जा रही इस रेत को डब्ल्यूसीएल (WCL) की नवनिर्मित खदान और सारणी के नए प्लांट के निर्माण कार्यों में डंपरों के माध्यम से खपाने की सुनियोजित प्लानिंग शुरू हो चुकी है।

एनजीटी के प्रतिबंध काल में ही खाली कर दिए नदी-नाले

क्षेत्र में इस बार मानसून के दौरान पर्याप्त बारिश न होने से गांधीग्राम खदान में रेत का जमाव नहीं हो सका है। चौंकाने वाली बात यह है कि जब एनजीटी का सख्त प्रतिबंध लागू था, उसी दौरान माफियाओं ने शक्तिगढ़ और गांधीग्राम के आसपास के नदी-नालों की अवैध खुदाई कर डाली। प्रतिबंध के बावजूद गांधीग्राम खदान में चल रहे निर्माण कार्य के लिए प्रचुर मात्रा में अवैध रेत का परिवहन पहले ही किया जा चुका है। अब एनजीटी की रोक हटते ही सारणी प्लांट और गांधीग्राम खदान निर्माण में रेत की सप्लाई को अचानक तेज कर दिया गया है।

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करोड़ों के जुर्माने का आरोपी फिर सक्रिय, 4 ट्रैक्टर और 1 डंपर उतारे

विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चोपना क्षेत्र में रेत का अवैध सिंडिकेट चलाने वाले पुराने चेहरे फिर से मैदान में उतर आए हैं। सूत्रों का दावा है कि तपन सरकार, महेश धुर्वे और पूर्व में करोड़ों रुपये के जुर्माने का आरोपी रह चुका छोटू बंगाली इस वक्त अपनी टीम को सक्रिय करने में जुटे हुए हैं। इस गिरोह ने अवैध रेत के उत्खनन और परिवहन के लिए 4 ट्रैक्टर और 1 डंपर मैदान में उतार दिया है। इनका मुख्य उद्देश्य डब्ल्यूसीएल की नवनिर्मित खदान और सारणी के निर्माणाधीन प्लांट में अवैध रेत सप्लाई कर अपनी जेबें भरना है, जिससे न केवल वैध ठेका कंपनी को सीधा नुकसान हो रहा है, बल्कि शासन को भी बड़े पैमाने पर राजस्व की चपत लगाई जा रही है।

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फॉरेस्ट बीट अधिकारी की शह पर नीलगढ़ के जंगलों में अवैध उत्खनन

नीलगढ़ के वन क्षेत्र (फॉरेस्ट एरिया) से गुजरने वाले नदी-नाले अपने अस्तित्व के साथ हो रहे इस खुले खिलवाड़ और ‘चीरहरण’ की चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं। जंगलों के भीतर से बिना किसी डर के रेत का दोहन किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो यह पूरा काला कारोबार नीलगढ़ के फॉरेस्ट बीट अधिकारी की सीधी मिलीभगत से अंजाम दिया जा रहा है। वन विभाग के मैदानी अमले के संरक्षण के बिना घने जंगल और कॉर्पोरेशन की जमीन से ट्रैक्टरों और डंपरों का निकलना असंभव है।

इनका कहना है :—

आपके माध्यम से जानकारी मिली है कि शक्तिगढ़ के पास की फॉरेस्ट की नदी नालों से रेत परिवहन किया जा रहा है। मैं जांच करवाता हूं। गलत पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।

नवनीत गर्ग, डीएफओ, उत्तर वन मंडल

आपके द्वारा जानकारी मिली है कि रामपुर रेंज की नीलगढ़ स्थित कॉर्पोरेशन की भूमि से रेत का अवैध खनन किया जा रहा है, मैं जांच कर कार्रवाई करवाता हूं।

एस.पी.शाक्य, डिवीजनल मैनेजर आफ कॉरपोरेशन

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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