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शादी की शहनाइयां बदलीं मातम की चीखों में: एंबुलेंस की कमी ने ली जान, बेटी ने मां को दी मुखाग्नि – Madhya Pradesh Voice

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शादी की शहनाइयां बदलीं मातम की चीखों में: एंबुलेंस की कमी ने ली जान, बेटी ने मां को दी मुखाग्नि


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02/05/2026 1:18 PM Total Views: 461210

सारनी। एक परिवार जहां शादी के मंगल गीत गाए जा रहे थे, वहां पल भर में मौत का सन्नाटा पसर गया। यह हृदयविदारक घटना सारनी के बगडोना क्षेत्र की है, जहां एक भतीजी की शादी की खुशियां देखते ही देखते गहरे शोक में डूब गईं। इस दुखद घटना ने न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों को उजागर किया है, बल्कि समाज के सामने एक बेटी के गहरे प्रेम और कर्तव्य की अनूठी मिसाल भी पेश की है।

खुशियों से मातम तक का सफर

पाथाखेड़ा के वार्ड क्रमांक 21 के निवासी चंपालाल साहू की पत्नी मुन्नी बाई अपनी भतीजी के विवाह समारोह में शामिल होने के लिए बगडोना की एमजीएम कॉलोनी आई हुई थीं। शुक्रवार को शादी संपन्न होनी थी और घर में उल्लास का माहौल था। गुरुवार की शाम को मुन्नी बाई के स्वास्थ्य में अचानक गिरावट आ गई। विवाह की गहमागहमी के बीच उनकी तबीयत बिगड़ने से परिवार में अफरा-तफरी मच गई। उन्हें तुरंत स्थानीय स्तर पर डॉ. झरबड़े को दिखाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तत्काल **घोड़ाडोंगरी सरकारी अस्पताल** ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए बैतूल रेफर कर दिया।

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एंबुलेंस की कमी और एक दर्दनाक अंत

इस पूरी घटना का सबसे दुखद और निराशाजनक पहलू स्वास्थ्य सुविधाओं की लचर व्यवस्था रही। बैतूल रेफर किए जाने के बाद परिवार को समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। इस देरी की कीमत मुन्नी बाई को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलने के कारण बैतूल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

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बिना भोज के हुई भतीजी की विदाई

जिस घर में शुक्रवार को भव्य दावत और जश्न की तैयारियां थीं, वहां मृत्यु की खबर पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। मुन्नी बाई के निधन के कारण भतीजी की शादी बेहद सादे और सामान्य तरीके से संपन्न कराई गई। विवाह समारोह में कोई भोज आयोजित नहीं किया गया और जो लोग खुशियों में शामिल होने आए थे, वे नम आंखों और भारी मन से वापस लौटे।

बेटी ने निभाई बेटे की जिम्मेदारी: रूढ़ियों को तोड़ती एक तस्वीर

पाथाखेड़ा मोक्ष धाम में जब मुन्नी बाई का अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तो वहां उपस्थित लोगों की आंखें एक बेहद भावुक दृश्य देखकर छलक पड़ीं। हिंदू रीति-रिवाजों में आमतौर पर माना जाता है कि पति या पुत्र ही मुखाग्नि देते हैं, लेकिन यहां एक रूढ़िवादी परंपरा टूटती हुई नजर आई। मुन्नी बाई को उनके पति ने नहीं, बल्कि उनकी तीसरे बेटी ने मुखाग्नि दी। स्वर्गीय मुन्नी बाई की तीन बेटियां हैं, जिनमें से दो बड़ी बेटियों का विवाह हो चुका है। परिवार और करीबियों के अनुसार, मुन्नी बाई अपनी इस सबसे छोटी बेटी से एक पुत्र के समान ही गहरा स्नेह और अगाध प्रेम करती थीं।

मां के प्रति इसी अटूट प्रेम और कर्तव्य को निभाते हुए, बेटी ने अपनी मां को मुखाग्नि दी। एक ओर यह घटना लचर स्वास्थ्य व्यवस्था का दर्दनाक अध्याय है, तो दूसरी ओर एक बेटी के असीम प्रेम की वह कहानी है, जो यह साबित करती है कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं होतीं।

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