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नगर परिषद घोड़ाडोंगरी का अजीबोगरीब कारनामा: वाह पाण्डे जी वाह फिर एक अस्थाई मजदूर को बना दिया सहायक नोडल अधिकारी – Madhya Pradesh Voice

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नगर परिषद घोड़ाडोंगरी का अजीबोगरीब कारनामा: वाह पाण्डे जी वाह फिर एक अस्थाई मजदूर को बना दिया सहायक नोडल अधिकारी


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01/05/2026 6:35 PM Total Views: 460969

सारणी/घोड़ाडोंगरी । मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ को लेकर नगर परिषद घोड़ाडोंगरी में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। परिषद के अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखते हुए एक अस्थाई मजदूर को योजना का ‘सहायक नोडल अधिकारी’ नियुक्त कर दिया है। यह मामला न केवल प्रशासनिक अनियमितता का उदाहरण है, बल्कि सरकारी पदानुक्रम और जिम्मेदारियों के निर्वहन पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

क्या है पूरा मामला?

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह का आयोजन 30 अप्रैल 2026 किया गया है। इस योजना में नगर परिषद द्वारा व्यवस्थाओं

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को पूर्ण करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होती हैं। नियमानुसार, इन कार्यों के लिए किसी नियमित अधिकारी या जिम्मेदार कर्मचारी को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाना चाहिए। लेकिन, नगर परिषद घोड़ाडोंगरी में नियमों की उल्टी गंगा बह रही है। यहाँ एक ऐसे व्यक्ति को सहायक नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसकी अपनी स्थिति परिषद में महज एक मजदूर (अस्थाई कर्मचारी) की है।

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विवाद के मुख्य बिंदु:

प्रशासकीय चूक: क्या एक अस्थाई मजदूर को शासन की महत्वाकांक्षी कन्या विवाह योजना की जिम्मेदारी निर्वाह करने के लिए नियमानुसार अधिकृत है?

जिम्मेदारी का अभाव: यदि योजना के क्रियान्वयन में कोई गड़बड़ी होती है, तो एक अस्थाई कर्मचारी की जवाबदेही कैसे तय की जाएगी?

नियमित कर्मचारियों की अनदेखी: परिषद में मौजूद अन्य नियमित और अनुभवी कर्मचारियों को दरकिनार कर एक अस्थाई मजदूर को यह पद देना संदेह के घेरे में है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस तरह की नियम विरुद्ध नियुक्तियां जानबूझकर की जाती हैं ताकि “पर्दे के पीछे” से भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा सके। अस्थाई कर्मचारियों पर दबाव बनाना आसान होता है, जिससे योजना की सामग्री खरीद में मनमानी की जा सके।

“यह पूरी तरह से नियमों का उल्लंघन है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना जैसी संवेदनशील योजना, जो सीधे गरीब जनता से जुड़ी है, उसे एक अस्थाई मजदूर के भरोसे छोड़ना परिषद की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है।”

अधिकारियों का मौन

इस पूरे प्रकरण पर जब नगर परिषद घोड़ाडोंगरी के प्रभारी सीएमओ नवनीत पांडे से संपर्क करने की कोशिश की गई, उन्होंने फोन नहीं उठाया जिस कारण उनका पक्ष प्रकाशित नहीं हो सका सवाल यह उठता है कि क्या उच्चाधिकारियों के संज्ञान में यह मामला है? यदि हाँ, तो अब तक इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

नगर परिषद घोड़ाडोंगरी का यह ‘कारनामा’ प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक मिसाल बन गया है। नकारात्मक रूप में। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप कर नियुक्ति को रद्द करता है या फिर घोड़ाडोंगरी में अस्थाई ‘मजदूर राज’ के साये में ही बेटियों की शादियां संपन्न होगी।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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