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‘आशिकी’ पिटाई कांड में बड़ा खुलासा: ‘आशिक’ निकला ब्लैकमेलर! 2 लाख और 80 हजार का मोबाइल डकारने के बाद भी कर रहा था प्रताड़ित – Madhya Pradesh Voice

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‘आशिकी’ पिटाई कांड में बड़ा खुलासा: ‘आशिक’ निकला ब्लैकमेलर! 2 लाख और 80 हजार का मोबाइल डकारने के बाद भी कर रहा था प्रताड़ित


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04/04/2026 1:01 AM Total Views: 492345

बैतूल/सारनी। जिले के गाड़ाघाट में हुई युवक की बेरहमी से पिटाई का मामला अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले चुका है। जिस युवक संदीप पाटिल को अब तक केवल एक ‘पिटा हुआ प्रेमी’ समझा जा रहा था, उसके पीछे ब्लैकमेलिंग और वसूली का एक काला खेल सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि इस वारदात की गूंज और सच्चाई की चर्चा घटनास्थल से 60 किलोमीटर दूर सारनी में हर जुबान पर है, लेकिन बैतूल की कोतवाली पुलिस और प्रशासन अब भी अंधेरे में तीर चला रहे हैं।

60 किमी दूर ‘नगर’ में चर्चा, पर पुलिस के पास ‘जानकारी नहीं’

गाड़ाघाट में हुई इस वारदात के बाद बैतूल पुलिस यह दावा कर रही है कि उन्हें अभी तक घटना की सटीक जानकारी और वजहों का पता नहीं चला है। जबकि वास्तविकता यह है कि पीड़ित युवक संदीप पाटिल के गृह नगर सारनी और पाथाखेड़ा में यह खबर आग की तरह फैल चुकी है कि यह मामला केवल प्रेम-प्रसंग का नहीं, बल्कि ‘हनीट्रैप’ और ‘ब्लैकमेलिंग’ से जुड़ा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जो जानकारी आम जनता तक पहुंच गई, वह पुलिस की फाइलों तक क्यों नहीं पहुंची?

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ब्लैकमेलिंग का खेल: 2 लाख का ट्रांजैक्शन और 80 हजार का मोबाइल

सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं से जो तथ्य सामने आए हैं, वे संदीप पाटिल के ‘आशिक’ वाले चेहरे को बेनकाब करते हैं। जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि संदीप पाटिल संबंधित महिला को लंबे समय से ब्लैकमेल कर रहा था। महिला डर और लोक-लाज के चलते उसे अब तक 2 लाख रुपए दे चुकी थी। इस मोटी रकम के ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और सबूत भी महिला के पास सुरक्षित उपलब्ध हैं। ब्लैकमेलिंग का आलम यह था कि महिला ने युवक को 80 हजार रुपए की कीमत वाला महंगा मोबाइल भी खरीद कर दिया था। जिस मोबाइल को महिला ने दिलाया था, उसी में कुछ आपत्तिजनक वीडियो थे, जिनके दम पर संदीप लगातार और पैसों की मांग कर रहा था। रविवार को जब वह युवती से मिलने पहुंचा, तो उसके पास वही वीडियो वाला मोबाइल था। युवती के परिजनों ने जब यह सब देखा, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने युवक के पास मौजूद उन्हीं ‘सबूतों’ के चलते उसकी धुनाई कर दी।

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कोतवाली पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पीड़ित महिला ने इस ब्लैकमेलिंग और प्रताड़ना की पूरी जानकारी पहले ही कोतवाली थाना को दे दी थी। इसके बावजूद पुलिस ने संदीप पाटिल के खिलाफ कोई निरोधात्मक कार्रवाई नहीं की। पुलिस की इसी सुस्ती का नतीजा रहा कि परिजनों को कानून हाथ में लेना पड़ा।

अब तक क्यों नहीं हुई FIR?

एक तरफ ब्लैकमेलिंग के पुख्ता सबूत (बैंक ट्रांजैक्शन और मोबाइल) की बात सामने आ रही है, और दूसरी तरफ सरेआम हुई मारपीट की घटना जगजाहिर है। इसके बावजूद बैतूल पुलिस ने अब तक न तो ब्लैकमेलर युवक पर मामला दर्ज किया न ही मारपीट करने वाले परिजनों पर कोई कार्रवाई की न ही महिला के पहले दिए गए शिकायती आवेदन पर संज्ञान लिया।

बैतूल पुलिस की यह ‘अघोषित खामोशी’ कई संदेह पैदा करती है। क्या पुलिस किसी दबाव में काम कर रही है या फिर जानबूझकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है? जिले की जनता अब जवाब चाहती है कि कानून का राज सड़क पर पिटने वाले और ब्लैकमेल करने वाले, दोनों के लिए समान क्यों नहीं है?

इनका कहना है:—

  • आपने खबर भी चलाई थी मैने देखा था हॉस्पिटल से मेरे पास अभी तहरीर नहीं आई है, अगर महिला ने शिकायत की होगी तो मामला दर्ज किया होगा। आप कल थाने आकर जानकारी ले लीजिए मैं आपको दे दूंगा।

देवकरण डहरिया, थाना प्रभारी कोतवाली बैतूल

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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