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क्षेत्र में फिर मंडराया ‘काले हीरे’ के तस्करों का साया: डुलारा गांव में सील खदानों से अवैध कोयला खनन धड़ल्ले से शुरू – Madhya Pradesh Voice

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क्षेत्र में फिर मंडराया ‘काले हीरे’ के तस्करों का साया: डुलारा गांव में सील खदानों से अवैध कोयला खनन धड़ल्ले से शुरू


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03/04/2026 1:19 AM Total Views: 462442

सारणी/बैतूल। जिले के घोड़ाडोंगरी तहसील क्षेत्र के डुलारा गांव में एक बार फिर काले हीरे (कोयले) की तस्करी का काला खेल शुरू हो गया है। प्रशासन की नाक के नीचे डुलारा गांव की तवा नदियों के किनारे स्थित जिन पुरानी खदानों को एसडीएम और कलेक्टर की सख्ती के बाद सील कर दिया गया था, उनके ताले अब फिर से टूट गए हैं। सूत्रों की मानें तो क्षेत्र में एक बार फिर पुराना नामी कोयला माफिया सक्रिय हो गया है, जिसे शाहपुर, बागडोना और बैतूल के कुछ रसूखदार सत्ताधारी नेताओं का खुला संरक्षण प्राप्त है।

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सफेदपोशों के साए में पनप रहा माफिया

लंबे समय से भूमिगत चल रहे पुराने कोयला माफिया ने एक बार फिर इलाके में अपनी जड़ें जमानी शुरू कर दी हैं। जानकारी के अनुसार, इस पूरे अवैध कारोबार में राजनीतिक रसूख का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। शाहपुर, बागडोना और बैतूल के सत्ताधारी नेताओं के आशीर्वाद से ही सील बंद खदानों से दिन-दहाड़े और रातों-रात बेखौफ होकर कोयले का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। प्रशासनिक कार्रवाई का कोई खौफ इन तस्करों में नजर नहीं आ रहा है, जो स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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तस्करी का यह है नया और सुरक्षित रूट

अवैध खनन के बाद इस चोरी के कोयले को खपाने के लिए एक सुनियोजित नेटवर्क तैयार किया गया है। सूत्रों ने बताया कि दुलारा गांव से निकाले गए कोयले को 10 चक्का भारी भरकम आयशर ट्रकों में भरकर बाहर भेजा जा रहा है। ट्रकों के जरिए कोयले की खेप को सलैया होते हुए सीधे बैतूल पहुंचाया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन की नजरों से बचने के लिए ‘छुपाना रूट’ का इस्तेमाल कर इस अवैध कोयले को होशंगाबाद (नर्मदापुरम) और राजधानी भोपाल की औद्योगिक इकाइयों तक खपाया जा रहा है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन खदानों को स्वयं कलेक्टर और एसडीएम स्तर के अधिकारियों ने अवैध खनन के चलते सील किया था, वहां दोबारा इतनी बड़ी मशीनरी और 10 चक्का वाहनों की आवाजाही कैसे शुरू हो गई? क्या स्थानीय पुलिस और खनिज विभाग को इस भारी पैमाने पर हो रहे खनन और परिवहन की भनक नहीं है, या फिर राजनीतिक दबाव के चलते सबने अपनी आंखें मूंद ली हैं?

नदियों का अस्तित्व और पर्यावरण फिर खतरे में

नदियों के किनारे हो रहे इस अंधाधुंध अवैध खनन से न सिर्फ सरकार को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है, बल्कि क्षेत्र का पर्यावरण और नदियों का अस्तित्व भी गंभीर खतरे में पड़ गया है, साथ ही पैसों के लिए काम कर रहे मजद। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि इस मामले में तत्काल एक उच्च स्तरीय जांच दल गठित कर मौके का मुआयना किया जाए और इस काले कारोबार में लिप्त माफियाओं सहित उन्हें संरक्षण देने वाले सफेदपोशों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

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