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प्रबंधन और ठेकेदारों के कथित गठजोड़ के खिलाफ सड़क पर उतरे सैकड़ों मजदूर, 500 रुपये दिहाड़ी और ‘अकाउंट से वापसी’ के खेल का भंडाफोड़ – Madhya Pradesh Voice

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प्रबंधन और ठेकेदारों के कथित गठजोड़ के खिलाफ सड़क पर उतरे सैकड़ों मजदूर, 500 रुपये दिहाड़ी और ‘अकाउंट से वापसी’ के खेल का भंडाफोड़


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22/02/2026 9:29 PM Total Views: 416549

सारनी। पाथाखेड़ा क्षेत्र की कोयला खदानों में अपना पसीना बहाने वाले ठेका मजदूरों का धैर्य अब जवाब दे गया है। लंबे समय से शोषण का शिकार हो रहे इन श्रमिकों का आक्रोश रविवार को पाथाखेड़ा के साप्ताहिक बाजार में आयोजित एक विशाल आम सभा में खुलकर सामने आ गया। अधिकारियों की टाल-मटोल और ठेकेदारों की मनमानी से त्रस्त सैकड़ों मजदूरों और श्रमिक नेताओं ने एक स्वर में आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। यदि अगले दो-तीन दिनों में स्थिति नहीं सुधरी, तो कोयलांचल में एक बड़ा अनिश्चितकालीन आंदोलन तय माना जा रहा है, जिससे खदानों का कामकाज ठप हो सकता है।
शोषण का नया तरीका: खाते में पूरा वेतन, फिर नकद वापसी का दबाव
बैठक में मजदूरों ने ठेकेदारों की कार्यप्रणाली को लेकर कई चौंकाने वाले और गंभीर खुलासे किए। मजदूरों का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर उनका खुलेआम आर्थिक शोषण किया जा रहा है। ठेकेदारों द्वारा कुछ मजदूरों के बैंक खातों में नियम अनुसार पूरा वेतन तो डाला जा रहा है, लेकिन बाद में उन पर दबाव बनाकर अतिरिक्त राशि वापस (कैश) ले ली जाती है। कई ठेकेदार मजदूरों को अपने घर बुलाकर नकद भुगतान कर रहे हैं और उन्हें महज 400 से 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दी जा रही है। जो भी मजदूर इस नाइंसाफी और ‘अकाउंट से वापसी’ के खेल का विरोध करता है, उसे सीधे काम से निकालने की धमकी दी जा रही है।
मजदूर नेताओं ने खोला मोर्चा
आम सभा को संबोधित करते हुए श्रमिक नेताओं ने प्रबंधन और ठेकेदारों की कड़ी आलोचना की। श्रमिक नेता प्रदीप नागले ने हुंकार भरते हुए कहा कि ठेका श्रमिकों के साथ लगातार धांधली, लूटखोरी और अत्याचार हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मजदूरों को इस बंधुआ मजदूरी जैसी स्थिति से निजात दिलाना संगठन का पहला और सर्वोच्च कर्तव्य है।
वहीं, कर्मनिष्ठ नेता संतोष देशमुख ने इस पूरे मामले को एक सुनियोजित षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने बताया कि ठेकेदारों द्वारा चुनिंदा मजदूरों को निशाना बनाकर उन पर मनोवैज्ञानिक और आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है।
प्रबंधन की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल खदान प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। मजदूरों ने सीधा और तीखा सवाल दागा है कि— जब तक श्रमिक वेतन पर्ची (Wage Slip) पर हस्ताक्षर नहीं करते, तब तक ठेकेदारों के बिल पास कैसे हो रहे हैं? बिना मजदूरों के हस्ताक्षर के पूर्ण भुगतान के बिल स्वीकृत होना, प्रबंधन के कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच एक गहरी और भ्रष्ट मिलीभगत की ओर सीधा इशारा करता है। इस गठजोड़ के कारण ही ठेकेदारों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
आगे की रणनीति: दो दिन का अल्टीमेटम
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि सोमवार को मुख्य महाप्रबंधक (CGM) के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिस पर सभी मजदूरों के सामूहिक हस्ताक्षर होंगे। ठेकेदारों और प्रबंधन को लंबित वेतन का पूरा भुगतान करने और शोषण बंद करने के लिए 2 से 3 दिन का सख्त अल्टीमेटम दिया गया है। यदि इस अवधि में उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो पूरे खदान क्षेत्र में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
पाथाखेड़ा क्षेत्र में इस समय श्रमिकों के बीच भारी असंतोष है। मजदूरों का स्पष्ट कहना है कि अब वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। भले ही अभी आंदोलन की आधिकारिक तिथि घोषित न हुई हो, लेकिन चिंगारी सुलग चुकी है। आने वाले कुछ दिनों में प्रबंधन का रुख ही यह तय करेगा कि क्षेत्र में औद्योगिक शांति बनी रहेगी या खदानों का पहिया अनिश्चितकाल के लिए थम जाएगा।

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