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यूजीसी के नए बदलावों के खिलाफ आमला में सवर्ण समाज का हल्लाबोल, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन – Madhya Pradesh Voice

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यूजीसी के नए बदलावों के खिलाफ आमला में सवर्ण समाज का हल्लाबोल, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन


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02/02/2026 10:23 PM Total Views: 416213

  • जनपद चौक से तहसील कार्यालय तक निकाली आक्रोश रैली, सरकार की सद्बुद्धि के लिए किया हनुमान चालीसा का पाठ
  • प्रदर्शनकारियों की चेतावनी: मांगें नहीं मानी तो जाएंगे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय
संवाददाता: सुधीर चौकीकर

आमला। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा वर्ष 2026 के लिए प्रस्तावित नए बदलावों और नीतियों के विरोध में रविवार को आमला का सवर्ण समाज सड़कों पर उतर आया। समस्त सवर्ण समाज के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में 200 से अधिक नागरिकों, प्रबुद्धजनों और युवाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जनपद चौक से तहसील कार्यालय तक निकाली गई इस आक्रोश रैली के माध्यम से समाज ने केंद्र सरकार की नीतियों के प्रति कड़ा विरोध जताया।

“दोषी बचे नहीं, निर्दोष फंसे नहीं” के नारों से गूंजा शहर

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रैली के दौरान वक्ताओं ने यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को भेदभावपूर्ण बताया। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि एससी-एसटी एक्ट की तर्ज पर बिना जांच गिरफ्तारी के प्रावधान और अन्य वर्गों को सवर्णों के खिलाफ सीधे शिकायत का अधिकार देना समाज में वैमनस्य पैदा करेगा। समाज की स्पष्ट मांग है कि कानून की मंशा “दोषी बचे नहीं और निर्दोष फंसे नहीं” की होनी चाहिए, न कि किसी विशेष वर्ग को लक्षित करने की।

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राष्ट्रपति को प्रेषित ज्ञापन की मुख्य आपत्तियां:

तहसीलदार के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में सवर्ण समाज ने निम्नलिखित गंभीर बिंदु उठाए हैं:

समानता का हनन: यह कानून संविधान की मूल भावना ‘समता और समानता’ के विरुद्ध है।

दुरुपयोग की आशंका: आशंका जताई गई है कि इस कानून का उपयोग व्यक्तिगत द्वेष या प्रतिस्पर्धा खत्म करने के लिए हथियार के रूप में किया जा सकता है।

स्वायत्तता पर प्रहार: प्रस्तावित बदलावों से उच्च शिक्षण संस्थानों की शैक्षणिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी।

भविष्य पर संकट: झूठे मामलों में फंसने से युवाओं का व्यक्तित्व और करियर पूरी तरह नष्ट हो सकता है।

हनुमान चालीसा का पाठ और चेतावनी

विरोध प्रदर्शन का एक अनोखा स्वरूप तहसील कार्यालय के सामने देखने को मिला, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की ‘सद्बुद्धि’ के लिए सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया। समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस ‘काले कानून’ को वापस नहीं लिया गया या इसमें आवश्यक सुधार नहीं किए गए, तो सवर्ण समाज अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court) की शरण लेगा।

प्रबुद्धजनों का मत

ज्ञापन सौंपते समय प्रतिनिधियों ने कहा कि देश के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले समाज को आज हाशिए पर धकेलने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता और सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए विशेषज्ञों और राज्य सरकारों से व्यापक परामर्श के बाद ही कोई नीति लागू की जाए।

इस प्रदर्शन में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य सहित समस्त सामान्य जातियों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में युवा शक्ति सम्मिलित रही।

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