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‘मौत के सिरप’ का जाल गहराया: ‘री-लाइफ’ और ‘रेस्पिफ्रेश टीआर’ में भी घातक DEG, गुजरात से जुड़े तार, स्वास्थ्य सुरक्षा पर बड़ा खतरा – Madhya Pradesh Voice

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‘मौत के सिरप’ का जाल गहराया: ‘री-लाइफ’ और ‘रेस्पिफ्रेश टीआर’ में भी घातक DEG, गुजरात से जुड़े तार, स्वास्थ्य सुरक्षा पर बड़ा खतरा


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07/10/2025 4:36 PM Total Views: 493489

भोपाल। मध्य प्रदेश में बच्चों की संदिग्ध मौतों से जुड़े ‘कफ सिरप कांड’ ने अब एक और खतरनाक मोड़ ले लिया है। प्रदेश की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) द्वारा कराई गई नई जांच रिपोर्ट में दो और कफ सिरप – ‘री-लाइफ’ और ‘रेस्पिफ्रेश टीआर’ – में बेहद घातक रसायन डायएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) की मानक से कई गुना अधिक मात्रा पाई गई है। चिंताजनक बात यह है कि इन दोनों सिरप का निर्माण गुजरात में हुआ है, जो इस पूरे संकट के दायरे को और भी विस्तृत करता है।

यह वही विषाक्त रसायन है जिसे पहले से प्रतिबंधित तमिलनाडु निर्मित ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप में भी पाया गया था और जिसे बच्चों में किडनी फेलियर, न्यूरोलॉजिकल डैमेज और अंततः मृत्यु जैसी घातक स्थितियों के लिए सीधा जिम्मेदार माना जा रहा है। इस नए खुलासे से प्रदेशभर में हड़कंप मच गया है और दवाओं की गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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नए जांच रिपोर्ट में तीन सिरप निकले खतरनाक:

छिंदवाड़ा में 26 से 28 सितंबर 2025 के बीच की गई औषधि निरीक्षण कार्रवाई के तहत कुल 19 नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए थे। सोमवार को आई इन रिपोर्टों में से चार सिरप को ‘असुरक्षित’ घोषित किया गया है, जिनमें से तीन में DEG की पुष्टि हुई है:

  • कोल्ड्रिफ (Coldrif) – बैच नंबर SR-13 (तमिलनाडु निर्मित): मध्य प्रदेश की रिपोर्ट में इसमें 46.2% डायएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) की पुष्टि हुई है। गौरतलब है कि तमिलनाडु से आई पूर्व रिपोर्ट में इसी सिरप में 48.6% DEG पाया गया था। स्वीकृत मानक के अनुसार, DEG की अधिकतम मात्रा 0.1% होनी चाहिए।
  • री-लाइफ सिरप (Relife) – बैच नंबर LSL25160 (गुजरात के राजकोट निर्मित): इस सिरप में 0.616% डायएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) की पुष्टि हुई है, जो मानक से 6 गुना अधिक है।
  • रेस्पिफ्रेश टीआर (Respifresh TR) सिरप – बैच नंबर R01GL2523 (गुजरात के अहमदाबाद निर्मित): इस सिरप में तो और भी अधिक, 1.342% डायएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) पाया गया है, जो मानक से 13 गुना से भी अधिक है।

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि बच्चों को जीवनरक्षक समझकर दी जा रही दवाएं वास्तव में उनकी जान की दुश्मन बन गई हैं।

सरकार का कड़ा एक्शन और जांच का दायरा:

‘कोल्ड्रिफ’ और ‘नेक्स्ट्रो-डीएस’ जैसे सिरप पहले ही प्रतिबंधित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, इंदौर की फार्मा कंपनी आर्क फार्मास्यूटिकल्स द्वारा बनाई गई ‘डिफ्रॉस्ट’ सिरप को भी तुरंत बाजार से वापस मंगाने के निर्देश दिए गए हैं और कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में औषधि निरीक्षण अभियान को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है। जिस भी दवा या सिरप पर संदेह है, उसे तुरंत बाजार से हटाने का आदेश दिया जा रहा है। प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने स्पष्ट किया है कि सरकार मरीजों की सुरक्षा को लेकर अत्यंत गंभीर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, ताकि इस तरह के ‘मौत के सौदागरों’ को सबक सिखाया जा सके।

मामले की तह तक जाने और व्यापक जांच सुनिश्चित करने के लिए जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट और मंडला जिलों के औषधि निरीक्षकों को मिलाकर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। यह टीम न केवल चूक के स्तरों की पहचान करेगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि किन जिम्मेदारों पर आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई बनती है।

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