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सारणी: दुर्गा प्रतिमा विसर्जन विवाद सुलझा, प्रशासन और हिंदू समाज में बनी सहमति, राजडोह नाव घाट पर होगा विसर्जन – Madhya Pradesh Voice

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सारणी: दुर्गा प्रतिमा विसर्जन विवाद सुलझा, प्रशासन और हिंदू समाज में बनी सहमति, राजडोह नाव घाट पर होगा विसर्जन


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21/09/2025 12:30 AM Total Views: 461164

सारणी। सारणी में पिछले कई दिनों से चल रहे दुर्गा प्रतिमा विसर्जन को लेकर अनिश्चितता और विवाद पर आखिरकार विराम लग गया है। प्रशासन और सकल हिंदू समाज के बीच हुई सहमति के बाद अब मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन राजडोह स्थित नाव घाट पर ही किया जाएगा। इस निर्णय से क्षेत्र के धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं में हर्ष का वातावरण है।

प्लांट प्रबंधन पर परंपरा तोड़ने का आरोप

वहीं दूसरी ओर, सतपुड़ा प्लांट प्रबंधन की नीतियों को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष भी देखने को मिला। लोगों का कहना है कि प्लांट प्रबंधन एक धर्मविरोधी और विक्षिप्त मानसिकता वाले व्यक्ति के चलते वर्षों पुरानी परंपरा को तोड़ने का प्रयास कर रहा था।

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गणेशोत्सव से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, गणेशोत्सव के दौरान प्रतिमा विसर्जन को लेकर प्लांट प्रबंधन ने प्रदूषण बोर्ड की मौखिक आपत्तियों का हवाला देते हुए नगर पालिका को पत्र लिखकर विसर्जन कुंड का विकल्प सुझाया था। इसी आधार पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन को भी सीमित करने की कवायद शुरू की गई, जिससे हिंदू समाज में रोष व्याप्त हो गया।

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शांति समिति की बैठक में हुआ था विवाद

इस मुद्दे को लेकर शांति समिति की बैठक में भी जमकर विवाद हुआ था और कोई निर्णय नहीं हो पाया था।

एसडीएम और सकल हिंदू समाज के बीच हुई सहमति

शुक्रवार को शाहपुर एसडीएम प्रपंज आर, नगर पालिका अध्यक्ष किशोर बरदे, नायब तहसीलदार संतोष पथोरिया, एसडीओपी प्रियंका करचाम, थाना प्रभारी जयपाल इनवातो, सतपुड़ा प्लांट के सिविल अधिकारी सुरेंद्र पांडे सहित प्रशासनिक अधिकारी और सकल हिंदू समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने मिलकर राजडोह नाव घाट का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान प्रशासन कुंड में विसर्जन करवाने पर जोर देता रहा, जबकि हिंदू समाज का कहना था कि विशाल प्रतिमाओं (10 से 20 फीट ऊंचाई तक) का विसर्जन कुंड में संभव नहीं है। लंबी चर्चा और तर्क-वितर्क के बाद अंततः नाव घाट पर सहमति बनी।

लिखित आदेश नहीं होने पर उठे सवाल

निरीक्षण के दौरान सतपुड़ा प्लांट सिविल विभाग ने स्वीकार किया कि पर्यावरण विभाग से कोई लिखित आदेश अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। केवल मौखिक निर्देशों का हवाला देकर विसर्जन रोका जा रहा था। इससे यह सवाल खड़ा हुआ कि जब कोई लिखित आदेश नहीं है तो परंपराओं पर रोक क्यों लगाई जा रही थी।

नगर पालिका करेगी आवश्यक व्यवस्था

सहमति बनने के बाद अब नगर पालिका नाव घाट पर विसर्जन हेतु आवश्यक व्यवस्था करेगी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

इस घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि किसी भी परंपरा को तोड़ने से पहले सभी पक्षों से बातचीत करना और उनकी भावनाओं का सम्मान करना जरूरी है।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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