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महिला बाल विकास परियोजना पर रिश्वतखोरी का आरोप, सहायिका पद के लिए आवेदकों से ‘वसूली’ का खेल? – Madhya Pradesh Voice

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महिला बाल विकास परियोजना पर रिश्वतखोरी का आरोप, सहायिका पद के लिए आवेदकों से ‘वसूली’ का खेल?


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13/08/2025 9:59 AM Total Views: 388186

सारणी। सारणी स्थित महिला बाल विकास परियोजना एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला है दो पदों पर सहायिका की नियुक्ति के लिए प्रबल दावेदारों से रिश्वत मांगने का। आरोप है कि परियोजना के अधिकारी आवेदकों से दस्तावेजों को आगे बढ़ाने और एसडीएम से काम करवाने के नाम पर वसूली कर रहे हैं।

मध्यप्रदेश महिला एवं बाल विकास संचालनालय महिला द्वारा 19 जून को जारी विज्ञापन के तहत नर्मदापुरम संभाग अंतर्गत जिला बैतूल में महिला एवं बाल विकास अंतर्गत संचालित एकीकृत बाल विकास परियोजना सारणी की आंगनबाड़ी में तिरुपति बालाजी वार्ड क्रमांक 12-2 में एक सहायिका और राधाकृष्ण वार्ड क्रमांक 2-3 में सहायिका के दो पदों पर नियुक्ति होनी है। आवेदन की अंतिम तिथि 4 जुलाई थी और आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन थी, जो पूर्ण हो चुकी है। भोपाल कार्यालय से मेरिट सूची परियोजना कार्यालय सत्यापन के लिए पहुंचाई गई है।

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CDPO और बाबू पर रिश्वत मांगने का आरोप

अब मेरिट सूची के आधार पर परियोजना सीडीपीओ (शिशु विकास परियोजना अधिकारी) को सत्यापन करना है कि किसके अंक ज्यादा हैं और किसके अंक कम, सारी जानकारी सत्यापित कर एसडीएम को सौंपनी है। इसी बात और कार्य का फायदा उठाकर सारणी परियोजना प्रभारी और सहायक ग्रेड तीन बाबू पर रिश्वत मांगने के आरोप लग रहे हैं।

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नाम न छापने की शर्त पर कार्यालय से जुड़े एक विश्वसनीय सूत्र ने बताया कि दो पदों पर आवेदन की तिथि समाप्त होने के बाद भोपाल मुख्यालय से मेरिट सूची परियोजना कार्यालय में सत्यापन के लिए आई हुई है, जिसमें ऑनलाइन फॉर्म भरने वालों का सत्यापन होगा। जिसमें सीडीपीओ और बाबू को पहले ही पता है कि अंकों के आधार पर किस महिला की सहायिका पद पर फाइनल नियुक्ति होगी।

“हींग लगे ना फिटकरी, रंग चोखा हो” की तर्ज पर चल रहा खेल

सूत्रों के अनुसार, “हींग लगे ना फिटकरी रंग चोखा हो” की तर्ज पर परियोजना प्रभारी और सहायक ग्रेड 3 बाबू द्वारा कागज ऊपर कर आगे बढ़ाने के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप लग रहे हैं। आवेदक को कहा जा रहा है कि आपके दस्तावेज आगे बढ़ाने से लेकर एसडीएम कार्यालय तक हम ही पहुंचाएंगे। इसके बाद बैतूल से नाम फाइनल होंगे। इस बीच एसडीएम से काम करवाने उन्हें अपना करीबी बताकर आवेदन कर्ताओं से वसूली की जा रही है। कहा जा रहा है कि सहायिका का पद पाने के लिए कुछ खर्च करना पड़ता है।

चौक-चौराहों पर रिश्वतखोरी की चर्चा

अब इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो आरोप लगाने वाले और प्रभारी सीडीपीओ और सहायक ग्रेड तीन बाबू ही जानें, लेकिन चौक-चौराहों पर एक नहीं दो नहीं कई लोग महिला बाल विकास परियोजना प्रभारी अधिकारी और बाबू द्वारा रिश्वत मांगे जाने की चर्चा कर रहे हैं। इतना ही नहीं, चर्चा तो यह भी चल रही है कि सारणी सेक्टर में जो पर्यवेक्षक है, उसे ही लंबे समय से प्रभारी अधिकारी बना रखा है, इसलिए वह पद का दुरुपयोग कर माल कमाने में लगे हुए हैं, ऐसी चर्चा नगर में चल रही है।

अधिकारियों ने साधी चुप्पी

इस संबंध में चर्चा करने के लिए मीडिया कर्मी द्वारा परियोजना प्रभारी संगीता धुर्वे और सहायक ग्रेड 3 बाबू संजय उईके के दूरभाष पर कॉल किया गया, लेकिन उनके द्वारा कॉल काटते हुए मीडिया कर्मी के सवाल जवाब से बचने के लिए कॉल रिसीव नहीं किया गया।

क्या होगी कार्रवाई?

महिला बाल विकास परियोजना सारणी में रिश्वतखोरी के इन आरोपों से विभाग की छवि धूमिल हुई है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या आवेदकों से रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों पर कोई गाज गिरती है या नहीं। इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सजा मिल सके। साथ ही, यह भी जरूरी है कि आवेदकों से रिश्वत मांगने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जाए, ताकि गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को बिना किसी परेशानी के सहायिका का पद मिल सके।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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