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बैतूल जेल में तनाव और आत्महत्या का मामला: जिला जेल अधीक्षक के कारनामों पर उठे सवाल – Madhya Pradesh Voice

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बैतूल जेल में तनाव और आत्महत्या का मामला: जिला जेल अधीक्षक के कारनामों पर उठे सवाल


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12/01/2025 1:30 PM Total Views: 491503

बैतूल। चर्चा का विषय बने जिला जेल अधीक्षक योगेंद्र तिवारी की कार्यशैली के चलते बैतूल जेल में एक बंदी ने आत्महत्या की है। सूत्रों के अनुसार, विचाराधीन बंदी संदीप उर्फ गोलू उर्फ मोटू उम्र 28 वर्ष, निवासी आठनेर, 18 दिसंबर 2024 को नाबालिग से रेप के आरोप में जेल आया था, जोकि बैरक नंबर- 2 में  बंद था। जिसने शनिवार और रविवार की रात्रि को बैरक के बथरूम कि छत पर लगे बाल्ली में बांधकर धोती नुमा कपड़े से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसे अधीक्षक की कथित प्रताड़ना के कारण इतना मानसिक तनाव हुआ कि उसने यह अत्यंत दुखद कदम उठाने का निर्णय लिया। घटनाक कि जानकारी कोतवाली पुलिस को दी गई मौके पर पहुंचे पुलिस दल ने शव को उतार कर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।

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जेल स्टाफ भी अधीक्षक की कार्यशैली से असंतुष्ट है और नौकरी में भय और दबाव महसूस कर रहा है। हालिया दिनों में 9-10 कर्मचारियों ने छुट्टी न मिल पाने के कारण योगदान नहीं दिया, जो कि अधीक्षक की तानाशाही का एक और उदाहरण है। कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है और यदि यह क्रम जारी रहा तो किसी भी समय गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

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इस स्थिति को लेकर बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल को भी जानकारी दी गई थी, लेकिन इस पर कोई कारगर कार्रवाई नहीं हुई। तिवारी के विवादास्पद और सख्त रवैये के कारण जेल का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो चुका है। बातचीत में यह भी सामने आया है कि जेल में सुधार की दिशा में सरकार के प्रयासों के बावजूद, ऐसे अधिकारियों के व्यवहार के कारण समुचित कार्यवाही नहीं हो पा रही।

हाल ही में स्थानीय मीडिया में यह भी खबर आई थी कि अधीक्षक ने जेल के अंदर प्राचीन फर्नीचर का गलत इस्तेमाल किया है, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। इस संदर्भ में, सरकारी संपत्ति के उपयोग में अनियमितता की भी जांच की जानी चाहिए।

जेल न केवल एक सुधारगृह है, बल्कि वहां बंधियों के सुधार का प्रयास किया जाता है। आत्महत्या की इस घटना ने स्पष्ट किया है कि अधीक्षक के तानाशाही रवैये से जेल का वातावरण नकारात्मक दिशा में जा रहा है। भय और तनाव में जी रहे बंदियों और कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए आवश्यक है कि इस मामले की गहन जांच की जाए और उचित कदम उठाए जाएं।

इस संपूर्ण घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक प्रभाव और राजनैतिक दबाव के विषय में प्रश्न उठाए हैं और बैतूल जेल की व्यवस्था को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता को उजागर किया है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस मसले पर संज्ञान लेगा और उचित कार्रवाई करेगा।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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