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सारनी ‘लूट कांड’ में सनसनीखेज मोड़: अधिकारी की रंगरेलियां और झूठी एफआईआर का भंडाफोड़! – Madhya Pradesh Voice

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सारनी ‘लूट कांड’ में सनसनीखेज मोड़: अधिकारी की रंगरेलियां और झूठी एफआईआर का भंडाफोड़!


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01/09/2026 5:38 PM Total Views: 493061

एमपीपीजीसीएल अधिकारी संजीव त्रिपाठी की ‘लूट’ की कहानी निकली मनगढ़ंत, पुलिस को किया गुमराह❓

खैरवानी के जंगल में महिला मित्र के साथ कार में थे अधिकारी, ग्रामीणों ने विरोध की आवाज सुनकर पकड़ा था❓

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पुलिस से बचने के लिए अधिकारी ने खुद ‘मुंह बंद’ रखने के एवज में ट्रांसफर किए थे 50 हजार रुपये❓

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महिला मित्र की नाराजगी से बौखलाकर चार निर्दोष युवाओं पर मढ़ दिया लूट का झूठा आरोप❓

सारनी। बीते दिनों सारनी पुलिस द्वारा जिस बहुचर्चित ‘कार सवार से लूट’ के मामले में चार युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, उसमें अब एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मोड़ आ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे तथ्यों और क्षेत्रीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एमपीपीजीसीएल के अधिकारी संजीव त्रिपाठी ने पुलिस और प्रशासन को पूरी तरह से गुमराह किया है। यह मामला किसी लूट का नहीं, बल्कि जंगल के अंधेरे में चल रही रंगरेलियों, ग्रामीणों द्वारा रंगेहाथों पकड़े जाने और अपनी इज्जत बचाने के लिए रची गई एक खौफनाक साजिश का है, जिसमें चार बेगुनाह युवकों को बलि का बकरा बना दिया गया।

क्या है असल कहानी? (सोशल मीडिया व ग्रामीणों के दावों के अनुसार)

सामने आ रहे नए तथ्यों के मुताबिक, 14 अगस्त की रात घटना मेन रोड पर लघुशंका के दौरान नहीं हुई थी, जैसा कि फरियादी ने पुलिस को बताया था। असलियत में, रात लगभग 8:30 बजे एमपीपीजीसीएल के अधिकारी संजीव त्रिपाठी खैरवानी मार्ग से करीब 100 मीटर अंदर सुनसान जंगल में अपनी एक महिला मित्र के साथ कार MP.GOV.MPPGCL SARNI कि वाहन में मौजूद थे।

इसी दौरान कार के अंदर से महिला के विरोध करने और घबराहट की आवाजें आईं, जिसे वहां से गुजर रही एक स्थानीय ग्रामीण महिला ने सुन लिया। अनहोनी की आशंका के चलते उस महिला ने तुरंत गांव के अन्य लोगों को इसकी सूचना दी।

पुलिस बुलाने के नाम पर गिड़गिड़ाने लगे अधिकारी

सूचना मिलते ही गांव के कुछ लोग और लूट के आरोप में फंसाए गए चारों युवक मौके पर पहुंच गए। जब उन्होंने कार के अंदर महिला के साथ जबरदस्ती जैसी स्थिति देखी, तो उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना देने की बात कही।

पुलिस का नाम सुनते ही शातिर अधिकारी संजीव त्रिपाठी के होश उड़ गए। समाज में बदनामी और नौकरी पर आंच आने के डर से त्रिपाठी वहां मौजूद लोगों के सामने मिन्नतें करने लगे कि वे पुलिस को न बुलाएं।

लूट नहीं, मुंह बंद रखने की दी गई थी ‘रिश्वत’

मामले को वहीं रफा-दफा करने और ग्रामीणों का मुंह बंद रखने के एवज में संजीव त्रिपाठी ने अपनी मर्जी से खुशी-खुशी उन्हें कुछ नगद रुपए दिए। बात यहीं खत्म नहीं हुई, त्रिपाठी ने ग्रामीणों को शांत करने के लिए अपने मोबाइल से 50 हजार रुपये भी उनके अकाउंट में ट्रांसफर किए, जिसे उन्होंने ‘उपहार’ और मामले को दबाने की कीमत बताया था।

झूठी एफआईआर की असली वजह

इस पूरे घटनाक्रम के बाद, संजीव त्रिपाठी के साथ मौजूद महिला मित्र (जो स्वयं को उनकी पत्नी बता रही थी) इस सरेआम हुई फजीहत से बेहद नाराज हो गई। उसने त्रिपाठी से संबंध तोड़ने की धमकी दे डाली।

महिला मित्र की धमकियों और ब्लैकमेलिंग से बौखलाए संजीव त्रिपाठी ने अपनी इज्जत बचाने और उन युवकों से बदला लेने के लिए एक खौफनाक साजिश रची। उन्होंने शातिर तरीके से पुलिस थाने जाकर पूरी कहानी को पलट दिया और उन चारों युवकों के खिलाफ लूट का झूठा मुकदमा दर्ज करवा दिया, जिन्होंने असल में एक महिला की मदद करने की कोशिश की थी।

पुलिस की जांच प्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल

इस खुलासे के बाद अब सारनी पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। फरियादी अधिकारी द्वारा रची गई इस मनगढ़ंत कहानी ने न सिर्फ पुलिस का कीमती समय बर्बाद किया है, बल्कि चार युवाओं का भविष्य भी अंधकार में डाल दिया है।

ग्रामीण और परिजनों का कहना है कि, इस पूरे प्रकरण की एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की जाए। घटनास्थल की सही लोकेशन, अधिकारी और महिला मित्र की कॉल डिटेल्स (CDR), और उस ग्रामीण महिला के बयान दर्ज किए जाएं जिसने सबसे पहले आवाज सुनी थी, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और निर्दोष युवाओं को न्याय मिल सके।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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