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श्रम अधिकारी की सख्ती के बाद झुका प्रबंधन, 3 दिन में खाते में आएगा मजदूरों का बकाया वेतन – Madhya Pradesh Voice

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श्रम अधिकारी की सख्ती के बाद झुका प्रबंधन, 3 दिन में खाते में आएगा मजदूरों का बकाया वेतन


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15/03/2026 1:19 AM Total Views: 461047

सारनी। खदान मजदूरों के पसीने की मिली कीमत, श्रम अधिकारी के हस्तक्षेप से हड़ताल स्थगित। सारनी और पाथाखेड़ा क्षेत्र की कोयला खदानों की गहराई में अपना पसीना बहाकर देश को रोशन करने वाले ठेका मजदूरों के लिए आखिरकार राहत की खबर आई है। अपने हक़ और बकाया वेतन के लिए अनिश्चितकालीन आंदोलन की राह पर उतरे इन मजदूरों का संघर्ष अब एक सकारात्मक समाधान की ओर बढ़ चुका है। प्रशासन की सक्रियता और श्रम विभाग के हस्तक्षेप के बाद ठेकेदारों और प्रबंधन को झुकना पड़ा है, जिससे मजदूरों में न्याय की उम्मीद जागी है।

आंदोलन स्थल पर पहुंचे श्रम अधिकारी, सुनीं जमीनी हकीकत

शनिवार को इस आंदोलन ने उस वक्त एक निर्णायक मोड़ लिया, जब दोपहर लगभग 12 बजे श्रम अधिकारी आशीष गुप्ता सीधे आंदोलन स्थल पर जा पहुंचे। एसी कमरों में बैठकर फैसला लेने के बजाय, उन्होंने तपती धूप में बैठे मजदूरों के बीच जाकर उनकी पीड़ा को बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। इसके तत्काल बाद, प्रबंधन और ठेकेदारों को तलब कर एक महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक की गई।

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3 दिन का अल्टीमेटम: सीधे खातों में आएगा पसीने का पैसा

बैठक में लंबी जद्दोजहद के बाद यह ठोस सहमति बनी कि प्रबंधन और ठेकेदार अपने नियमों और कागजी प्रक्रियाओं को दरकिनार न करते हुए, अगले 3 दिनों (72 घंटे) के भीतर हर हाल में मजदूरों का बकाया वेतन उनके बैंक खातों में ट्रांसफर करेंगे। इस मजबूत आश्वासन और लिखित सहमति के बाद, खदान मजदूरों ने अपनी एकता का परिचय देते हुए सोमवार से प्रस्तावित अपने अनिश्चितकालीन आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का बड़ा फैसला लिया है।

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ठेकेदारों को सख्त चेतावनी: “अब नहीं चलेगी मनमानी”

श्रम अधिकारी ने ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर सख्त नाराजगी जताते हुए कड़े निर्देश जारी किए हैं। सभी मजदूरों को उनका संपूर्ण वेतन हर महीने तय समय पर मिलना चाहिए। भविष्य में किसी भी मजदूर के वेतन में अकारण देरी नहीं होनी चाहिए और न ही किसी मजदूर को बिना किसी वैध कारण के काम से निकाला जाना चाहिए। श्रम कानूनों का सख्ती से पालन अनिवार्य है।

सालों से फंसे सीएमपीएफ (CMPF) पर भी मिली संजीवनी

वेतन के अलावा मजदूरों की एक और बड़ी और पुरानी समस्या उनके काटे गए प्रोविडेंट फंड (CMPF) की थी। कई वर्षों से लंबित इस मामले में भी श्रम अधिकारी ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जिन मजदूरों का पीएफ का पैसा फंसा हुआ है, उसकी आवश्यक कागजी कागजी कार्यवाही तुरंत पूरी कराकर राशि वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह कदम उन मजदूरों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है, जो सालों से अपने ही पैसों के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे।

समाजसेवियों और जन प्रतिनिधियों का मिला भरपूर साथ

मजदूरों की इस लड़ाई में वे अकेले नहीं थे; क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी उनके कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ दिया। आंदोलन स्थल पर प्रदीप नागले, मनोज पवार, संतोष देशमुख, बाबूलाल भारती, धर्मेन्द्र चौरे, लिखीराम, बलराम देशमुख, मोहन, और अजय सहित कई गणमान्य समाजसेवी और मजदूर प्रतिनिधि प्रमुख रूप से डटे रहे। इनकी उपस्थिति ने प्रबंधन पर दबाव बनाने में अहम भूमिका निभाई।

आगे क्या?

हड़ताल भले ही स्थगित हो गई है, लेकिन मजदूरों की आंखें अब अगले तीन दिनों तक अपने बैंक खातों पर टिकी रहेंगी। मजदूरों ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन और प्रबंधन के इस हस्तक्षेप से उन्हें स्थायी समाधान की उम्मीद है। यदि 72 घंटे में वादे पूरे नहीं हुए, तो यह चिंगारी फिर से भड़क सकती है।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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