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होली पर मिलावटखोरों का साया: बाजारों में रौनक, पर खाद्य विभाग की चुप्पी से उठते सवाल – Madhya Pradesh Voice

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होली पर मिलावटखोरों का साया: बाजारों में रौनक, पर खाद्य विभाग की चुप्पी से उठते सवाल


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02/03/2026 4:02 PM Total Views: 461330

होली बाजार में मिलावट का खतरा, विभाग कब दिखाएगा सख्ती?

बैतूल/सारणी। रंगों और उमंगों का पर्व होली जैसे-जैसे करीब आ रहा है, बाजारों में त्योहारी रौनक छाने लगी है। मिठाई, नमकीन, मावा, रंग-गुलाल और ठंडे पेय पदार्थों की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। लेकिन इस चकाचौंध और त्योहारी उत्साह के पीछे एक गहरा डर भी छिपा है, मिलावटखोरी का डर।

बाजारों में बढ़ती मांग के बीच मुनाफाखोर सक्रिय हो गए हैं, लेकिन जिले का खाद्य विभाग अब तक कोई ठोस कार्रवाई करता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में आम नागरिकों के जहन में एक ही सवाल गूंज रहा है: क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही नींद से जागेगा?

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त्योहार की आड़ में ‘जहर’ का कारोबार

हर साल त्योहारी सीजन में घटिया और मिलावटी मावा, कृत्रिम रंगों (केमिकल युक्त) से बनी चमचमाती मिठाइयां और बिना किसी मानक के तैयार की गई खाद्य सामग्री धड़ल्ले से बेची जाती है। मांग अधिक होने के कारण दूध और असली मावे की कमी को पूरा करने के लिए सिंथेटिक मावे और पाम ऑयल का जमकर इस्तेमाल होता है।

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लगातार सामने आती शिकायतों के बावजूद, जिले में अब तक कोई व्यापक और विशेष जांच अभियान या सघन सैंपलिंग शुरू नहीं की गई है। खाद्य विभाग की इस उदासीनता से लोगों में भारी आक्रोश पनप रहा है।

जनता का सीधा सवाल—आखिर कार्रवाई कब?

नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि होली जैसे बड़े पर्व पर मिलावटखोरी की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। यदि समय रहते जांच और सैंपलिंग नहीं की गई, तो यह सीधे तौर पर आम जनता और मासूम बच्चों के स्वास्थ्य के साथ एक भद्दा खिलवाड़ साबित होगा। सिर्फ दफ्तरों में बैठकर कागजी खानापूर्ति करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि मैदानी स्तर पर सख्त एक्शन की जरूरत है।

प्रशासन से जनता की कुछ त्वरित और स्पष्ट अपेक्षाएं हैं। शहर की प्रमुख मिठाई दुकानों, कारखानों और गोदामों पर अचानक छापे मारे जाएं। डेयरी प्रतिष्ठानों से मावा, दूध, पनीर और घी के सैंपल तत्काल लिए जाएं और उनकी त्वरित जांच हो। नमकीन निर्माताओं, होटलों और रेस्टोरेंट की किचन में इस्तेमाल होने वाले तेल और कच्चे माल की गुणवत्ता परखी जाए। स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले रासायनिक रंगों और अवैध सामग्री को जब्त कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

“त्योहारों पर बिकने वाला मिलावटी मावा, घटिया तेल और खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले अखाद्य (Non-edible) कृत्रिम रंग धीमे जहर की तरह काम करते हैं। इनके सेवन से गंभीर फूड प्वाइजनिंग, आंतों में इन्फेक्शन, पीलिया और लिवर-किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह सबसे ज्यादा खतरनाक है।” प्रशासन की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले इन सफेदपोश अपराधियों पर लगाम कसे। नागरिकों की मांग है कि सिर्फ खानापूर्ति के लिए एकाध सैंपल लेने के बजाय, एक व्यापक अभियान चलाकर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए।

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