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WCL खदान: लालची और कमीशनखोर ठेकेदारों को न कानून का खौफ, न प्रशासन का डर; खुलेआम गुंडागर्दी और शोषण के खिलाफ मजदूरों की हुंकार! – Madhya Pradesh Voice

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WCL खदान: लालची और कमीशनखोर ठेकेदारों को न कानून का खौफ, न प्रशासन का डर; खुलेआम गुंडागर्दी और शोषण के खिलाफ मजदूरों की हुंकार!


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15/02/2026 7:47 PM Total Views: 461038

सारनी। नगर क्षेत्र की भूमिगत कोयला खदानों में पसीना बहाने वाले ठेका मजदूरों का शोषण अब बर्दाश्त की हदें पार कर चुका है। खून-पसीना एक कर कोयला निकालने वाले इन मजदूरों को लालची और कमीशनखोर ठेकेदारों ने बंधुआ मजदूर समझ लिया है। हालात ये हैं कि इन बेलगाम ठेकेदारों को अब न तो कानून और प्रशासन का कोई डर रह गया है और न ही खदान प्रबंधन का। प्रबंधन के आदेशों को ठेंगे पर रखते हुए, ठेकेदार खुलेआम मजदूरों की गाढ़ी कमाई डकार रहे हैं और विरोध करने पर काम से निकालने की धमकियां दे रहे हैं।

शोषण का ‘कमीशन मॉडल’: खाते में पैसा डालो और वापस निकाल लो

श्रम कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए मजदूरों को निर्धारित श्रेणी के अनुसार वेतन नहीं दिया जा रहा है। ठेकेदारों ने शोषण का एक नया और शर्मनाक तरीका ईजाद किया है— दिखावे के लिए मजदूरों के बैंक खातों में वेतन डाला जाता है और फिर उनसे वह राशि वापस मांग ली जाती है।

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जब मजदूरों ने प्रबंधन से इसकी शिकायत की और प्रबंधन के निर्देश पर ठेकेदारों को यह पैसा वापस लौटाने से साफ इनकार कर दिया, तो बौखलाए ठेकेदारों ने अपनी तानाशाही दिखाते हुए उन मजदूरों को काम से ही निकाल दिया।

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“500 रुपये काटो और बाकी वापस करो, वरना एक फूटी कौड़ी नहीं दूंगा…”

ठेकेदारों की दबंगई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिन मजदूरों का भुगतान अब तक नहीं हुआ है, उन पर खुलेआम दबाव बनाया जा रहा है। दबी जुबान में एक खौफजदा कर्मचारी ने ठेकेदार की बेशर्मी का खुलासा करते हुए बताया कि ठेकेदार ने साफ कह दिया है: “500 रुपए दिहाड़ी काटकर बाकी पैसे मुझे वापस देते हो, तो ही मैं खाते में पेमेंट डालूंगा। नहीं तो जो करना है कर लो, जिसके पास जाना है जाओ, मैं एक फूटी कौड़ी नहीं दूंगा।”

यह सीधा बयान साबित करता है कि इन कमीशनखोर ठेकेदारों की नजरों में प्रशासन और कानून की कोई हैसियत नहीं है, तो फिर प्रबंधन की तो बात ही छोड़िए।

आवाज उठाने पर प्रबंधन का दबाव: मकान खाली करने का नोटिस

हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले में प्रबंधन की भूमिका भी संदिग्ध और ठेकेदारों की शह देने वाली नजर आ रही है। जब मजदूर नेता प्रदीप नागले ने इस खुले शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद की, तो ठेकेदारों पर कार्रवाई करने के बजाय, प्रबंधन ने उल्टे नागले को ही मकान खाली करने का नोटिस थमा दिया। यह साफ तौर पर मजदूरों की आवाज को कुचलने की एक घिनौनी साजिश है। हालांकि, मजदूर नेता ने साफ कर दिया है कि वे इन गीदड़ भभकियों से डरने वाले नहीं हैं और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए यह लड़ाई जारी रहेगी।

प्रशासन को 7 दिन का अल्टीमेटम: अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

मजदूरों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। उन्होंने प्रबंधन को स्पष्ट ज्ञापन सौंपते हुए 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है। आज (15 फरवरी 2026) इस अल्टीमेटम का चौथा दिन है, लेकिन ठेकेदारों के अड़ियल रवैये और प्रबंधन की खामोशी से अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।

यदि प्रशासन और प्रबंधन ने अपनी कुंभकर्णी नींद से जागकर इन बेलगाम ठेकेदारों पर तुरंत नकेल नहीं कसी, तो सारनी की कोयला खदानों में एक बड़ा और उग्र अनिश्चितकालीन आंदोलन तय है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और खदान प्रबंधन की होगी।

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