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पाथाखेड़ा कोयला खदान मजदूरों के संघर्ष का सुखद परिणाम, प्रबंधन ने मानी शर्तें, ‘कैश-बैक’ वसूली पर संगठन का अल्टीमेटम – Madhya Pradesh Voice

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पाथाखेड़ा कोयला खदान मजदूरों के संघर्ष का सुखद परिणाम, प्रबंधन ने मानी शर्तें, ‘कैश-बैक’ वसूली पर संगठन का अल्टीमेटम


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09/02/2026 5:10 PM Total Views: 461026

प्रबंधन के आश्वासन पर खत्म हुआ गतिरोध: बोनस भुगतान की पुष्टि के बाद काम पर लौटने को राजी हुए कोयला कामगार

बैतूल/सारनी। कोयला खदानों में पसीना बहाने वाले मजदूरों के लंबे संघर्ष और एकजुटता ने आखिरकार रंग दिखाया है। शोषण, असुरक्षा और वेतन विसंगतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे मजदूरों की सोमवार को वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (WCL) प्रबंधन के साथ एक निर्णायक बैठक संपन्न हुई। पाथाखेड़ा स्थित जीएम कार्यालय में हुई इस उच्च-स्तरीय वार्ता में प्रबंधन ने न केवल मजदूरों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर सहमति जताई, बल्कि भविष्य में शोषण के खिलाफ सख्त कदम उठाने के संकेत भी दिए।

प्रबंधन के समक्ष लिखित में रखीं समस्याएं

सोमवार को आयोजित इस बैठक में डब्लूसीएल (WCL) के एपीएम ललित प्रकाश तिर्की और एचआरएम विनायक शंकर विशेष रूप से उपस्थित रहे। मजदूरों का प्रतिनिधित्व कर रहे दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा। इसमें खदानों के भीतर सुरक्षा उपकरणों (Safety Gears) के अभाव, जान जोखिम में डालकर काम करने की मजबूरी और मूलभूत सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को विस्तार से रखा गया। मजदूरों ने स्पष्ट किया कि अब वे शोषण और असुरक्षा के माहौल में काम नहीं करेंगे।

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प्रमुख मांगों पर बनी सहमति

बैठक सकारात्मक रही और प्रबंधन ने मजदूरों की जायज मांगों पर तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रबंधन ने स्वीकार किया कि मजदूरों की सुरक्षा सर्वोपरि है और जल्द ही खदान में कार्यरत श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा किट और उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। खदान में काम करने वाले प्रत्येक श्रमिक को अब चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा। सीएमपीएफ (CMPF) को ईपीएफ (EPF) में बदलने की जटिल प्रक्रिया को अगले 2 से 4 माह के भीतर पूरा करने का ठोस आश्वासन दिया गया। प्रबंधन ने जानकारी दी कि बोनस की राशि ठेकेदारों को जारी कर दी गई है, जो श्रमिकों के भुगतान के साथ उन्हें मिलनी चाहिए।

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ठेकेदारों की ‘अवैध वसूली’ पर आर-पार के मूड में संगठन

बैठक का सबसे संवेदनशील और गंभीर मुद्दा ठेकेदारों द्वारा कथित आर्थिक शोषण रहा। मजदूर प्रतिनिधियों ने खुलासा किया कि ठेकेदार श्रमिकों के खातों में 30 से 35 हजार रुपये जमा तो करवाते हैं, लेकिन बाद में दबाव बनाकर वह राशि नकद वापस मांगते हैं।

इस पर प्रबंधन ने पल्ला झाड़ते हुए स्पष्ट किया कि, “यदि मजदूर अपने खाते से राशि निकालकर ठेकेदार को वापस देते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी प्रबंधन की नहीं होगी।”

प्रबंधन के इस रुख पर मजदूर संगठनों ने दो-टूक चेतावनी दी है। प्रतिनिधियों ने कहा, “अब कोई भी श्रमिक ठेकेदार को एक भी रुपया वापस नहीं देगा। यदि किसी ठेकेदार ने जबरन वसूली या दबाव बनाने का प्रयास किया, तो संगठन चुप नहीं बैठेगा और सीधे प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई (FIR) के लिए बाध्य होगा।”

काम पर लौटने को तैयार हुए मजदूर

सुरक्षा, सम्मान और सुविधाओं पर प्रबंधन से मिले ठोस आश्वासन के बाद, मजदूर प्रतिनिधियों ने चल रहे गतिरोध को समाप्त करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि प्रबंधन की सलाह और वादों पर भरोसा जताते हुए मजदूर पुनः कार्य पर लौटने को सहमत हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि तय समयसीमा में वादे पूरे नहीं हुए, तो आंदोलन और भी उग्र हो सकता है।

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