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75 साल का सब्र टूटा, रतेड़ा में ग्रामीणों ने किया चक्काजाम – ‘वोट बैंक’ की राजनीति अब नहीं चलेगी – Madhya Pradesh Voice

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75 साल का सब्र टूटा, रतेड़ा में ग्रामीणों ने किया चक्काजाम – ‘वोट बैंक’ की राजनीति अब नहीं चलेगी


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07/02/2026 12:28 AM Total Views: 462728

बैतूल/आमला। आजादी के बाद से देश कहां से कहां पहुंच गया, लेकिन बैतूल जिले के आमला ब्लॉक स्थित रतेड़ा गांव के ग्रामीण आज भी एक पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं। शुक्रवार को ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। रतेड़ा-लादी-सारणी मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने आमला-सारणी मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया।

चुनावी वादों और भूमिपूजन का ‘छलावा’

ग्रामीणों का आक्रोश केवल सड़क न होने को लेकर नहीं, बल्कि वर्षों से मिल रहे झूठे आश्वासनों को लेकर था। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि पिछले 75 वर्षों से इस मार्ग का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन पक्की सड़क आज तक नसीब नहीं हुई।

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ग्रामीणों ने नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा “चुनाव आते ही नेता केवल भूमिपूजन की रस्म अदायगी करते हैं और फोटो खिंचवाकर चले जाते हैं। जनता को सिर्फ ‘वोट बैंक’ समझा गया है। अब केवल भूमिपूजन नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहिए।”

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क्यों अहम है यह सड़क? (सामरिक और आर्थिक महत्व)

यह सड़क केवल रतेड़ा गांव की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा बन सकती है। ग्रामीणों ने इस मार्ग की तकनीकी और व्यावहारिक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस सड़क के बनने से आसपास के लगभग 24 गांवों का संपर्क सीधा और सुगम हो जाएगा। ग्रामीणों के अनुसार, यह मार्ग कम लागत में तैयार किया जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें कोई ‘घाट सेक्शन’ नहीं है, जिससे यह यात्रा के लिए बेहद सुरक्षित होगा। इस मार्ग के शुरू होने से वर्तमान सारणी-दमुआ मार्ग पर वाहनों का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा, जिससे क्षेत्र में कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

प्रशासन को 5 दिन का अल्टीमेटम

शुक्रवार को हुए इस विरोध प्रदर्शन के दौरान आमला-सारणी मार्ग पर करीब एक घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा। मौके की नजाकत को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों की लंबी समझाइश और आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने जाम तो समाप्त कर दिया, लेकिन एक कड़ी चेतावनी भी दी।

ग्रामीणों ने प्रशासन को 5 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

इन्होंने संभाली आंदोलन की कमान

सड़क की मांग को लेकर हुए इस जोरदार प्रदर्शन का नेतृत्व समाजसेवी जितेंद्र शर्मा, सरपंच अर्जुन उइके, राजू शीलू, दुर्गेश यादव और मनीराम कुमरे ने किया। इस दौरान मौके पर बड़ी संख्या में युवा, बुजुर्ग और महिलाएं मौजूद रहीं, जो अपनी मांगों को लेकर अडिग दिखाई दिए।

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