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‘वोकल फॉर लोकल’ का नारा हुआ तार-तार, बाहरी कंपनियों और ‘कमीशनराज’ के मकड़जाल में फंसे स्थानीय ठेकेदार – Madhya Pradesh Voice

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‘वोकल फॉर लोकल’ का नारा हुआ तार-तार, बाहरी कंपनियों और ‘कमीशनराज’ के मकड़जाल में फंसे स्थानीय ठेकेदार


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03/02/2026 6:21 PM Total Views: 461043

बैतूल/सारणी सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, जो कभी क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ माना जाता था, आज स्थानीय उद्यमियों और युवाओं के लिए निराशा का केंद्र बन गया है। वर्षों से पावर हाउस को अपनी सेवाएं दे रहे स्थानीय MSME ठेकेदारों को एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। आरोप है कि प्रबंधन और कुछ बड़े रसूखदार ठेकेदारों की मिलीभगत ने टेंडर प्रक्रिया को ‘कमीशन’ के खेल में बदल दिया है, जिससे स्थानीय रोजगार पर गहरा संकट मंडराने लगा है।

अनुभव पर भारी पड़ रही ‘शर्तों की बाजीगरी’

स्थानीय ठेकेदारों का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में टर्नओवर (Turnover) की शर्तों को जानबूझकर इतना जटिल और बड़ा कर दिया गया है ताकि छोटे और मझोले स्थानीय ठेकेदार (MSME) दौड़ से पहले ही बाहर हो जाएं। जो ठेकेदार पिछले 15-20 वर्षों से पूरी ईमानदारी और कुशलता के साथ पावर हाउस में काम कर रहे थे, आज उन्हें अयोग्य घोषित किया जा रहा है।

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स्थानीय ठेकेदारों विजय पढ़लक का कहना है, “हमारा अनुभव और काम की गुणवत्ता मायने नहीं रखती, अधिकारियों को केवल बड़े टर्नओवर वाली बाहरी कंपनियों से मतलब है, ताकि पर्दे के पीछे का खेल जारी रह सके।”

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दलालों का राज और मजदूरों का शोषण

बाहरी बड़ी कंपनियों के आने से जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार का एक नया मॉडल खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़ी कंपनियां खुद काम नहीं करतीं, बल्कि ‘पेटी कॉन्ट्रैक्ट’ (Sub-letting) के जरिए काम उन दलालों को सौंप देती हैं जो नाम बदल-बदल कर सक्रिय हैं।

ये बिचौलिये (दलाल) मजदूरों की मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहे हैं। मजदूरी में कटौती, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और स्थानीय कामगारों का मानसिक शोषण अब आम बात हो गई है। पुराने ठेकेदारों के पास काम करने वाले वफादार मजदूर अब इन दलालों के रहमो-करम पर जीने को मजबूर हैं।

अधिकारियों और बड़े ठेकेदारों का ‘नेक्सस’ (Nexus)

इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर आरोप ‘सिंडिकेट’ का है। सूत्रों और पीड़ित ठेकेदारों के मुताबिक, कुछ चुनिंदा बड़े ठेकेदार हर काम में अपनी संलिप्तता चाहते हैं।आरोप है कि अधिकारी मोटे कमीशन के लालच में इन्हीं बड़े ठेकेदारों को सर्वोपरि रखते हैं। नियमों को इस तरह तोड़ा-मरोड़ा जाता है कि टेंडर अंततः इन्हीं चहेती फर्मों की झोली में गिरे।यह सिंडिकेट इतना हावी है कि एक आम स्थानीय उद्यमी के लिए पारदर्शी तरीके से काम हासिल करना असंभव हो गया है।

सरकारी नीतियों का खुला उल्लंघन

केंद्र और राज्य सरकार मंचों से MSME और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन सारणी पावर हाउस की हकीकत इसके ठीक उलट है। स्थानीय इकाइयों को प्राथमिकता (Preference) देने के बजाय उन्हें बाहर करने की नीति अपनाई जा रही है। सरकारी मंशा स्थानीय युवाओं को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने की है, लेकिन MPPGCL प्रबंधन की नीतियां उन्हें ‘बेरोजगार’ बना रही हैं।

PMO से लेकर CVC तक पहुंची शिकायत

इस अन्याय के खिलाफ सतपुड़ा ठेकेदार संघ अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME Ministry), केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) – भ्रष्टाचार की जांच हेतु, मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा मंत्री, मध्य प्रदेश, मुख्य अभियंता और MPPGCL प्रबंधन को उच्च स्तरों पर लिखित शिकायतें भेजी गई हैं और उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।

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