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विकास के नाम पर उजड़े 50 आदिवासियों के आशियाने, 11 दिनों से खुले आसमान के नीचे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे पीड़ित – Madhya Pradesh Voice

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विकास के नाम पर उजड़े 50 आदिवासियों के आशियाने, 11 दिनों से खुले आसमान के नीचे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे पीड़ित


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09/01/2026 11:59 AM Total Views: 460458

बुदनी/सीहोर। मध्यप्रदेश की सबसे हाई-प्रोफाइल और ‘वीआईपी’ मानी जाने वाली बुदनी विधानसभा सीट, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपना ‘परिवार’ बताते हैं, आज वहां के आदिवासी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं। पिछले 11 दिनों से जयस (JAYS) के नेतृत्व में आदिवासियों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है, लेकिन विडंबना यह है कि प्रशासन ने अब तक इनकी सुध लेना उचित नहीं समझा है।

विकास की कीमत: बेघर हुए 50 परिवार

आरोप है कि रेलवे लाइन, नेशनल हाईवे और वर्धमान ग्रुप के प्रोजेक्ट्स के लिए प्रशासन ने मानवता को ताक पर रख दिया है। तालपुरा और पीलीकरार गांव में प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना और विस्थापन की व्यवस्था किए, लगभग 50 आदिवासी परिवारों के मकानों को जमींदोज कर दिया।

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स्थानीय किसानों और पीड़ितों का दर्द यह है कि प्रशासन की निर्दयता केवल मकान तोड़ने तक सीमित नहीं रही, बल्कि खेतों में लहलहाती खड़ी फसलों पर भी बुलडोजर चला दिए गए। पीड़ितों का कहना है कि, “मुआवजे के नाम पर हमारे साथ धोखाधड़ी की गई है। प्रशासन ने उचित मुआवजा देने के बजाय कौड़ियों के दाम पर हमारी कीमती जमीनें छीन ली हैं और हमें बेघर कर दिया है।”

‘परिवार’ कहने वाले नदारद

यह वही विधानसभा क्षेत्र है जहां से शिवराज सिंह चौहान लगातार जीतकर विधानसभा पहुंचते रहे हैं और वे मंचों से बुदनी की जनता को अपना परिवार कहते आए हैं। लेकिन आज जब इस ‘परिवार’ के 50 घरों के चिराग बुझ गए हैं और वे कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे बैठे हैं, तो न तो कोई प्रशासनिक अधिकारी और न ही कोई बड़ा जन-प्रतिनिधि उनके आंसू पोंछने पहुंचा है। प्रशासन द्वारा आदिवासियों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया जा रहा है।

वामपंथी नेताओं ने दिया संघर्ष को समर्थन

प्रशासन और सत्ता पक्ष की चुप्पी के बीच, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिव जसविंदर सिंह को जैसे ही इस घटना की जानकारी मिली, वे तत्काल धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित आदिवासी परिवारों से मुलाकात की और पूरी स्थिति का जायजा लिया।

जसविंदर सिंह के साथ मध्य प्रदेश आदिवासी एकता महासभा के नेता तेज कुमार तिग्गा, सीटू (CITU) नेता बलवंत डांगे और कुलदीप सिंह भी मौजूद रहे। इन नेताओं ने संघर्षरत आदिवासियों को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

धरना स्थल से नेताओं ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आदिवासियों को उनका हक, उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिला, तो यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर आदिवासियों का विनाश किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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