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नगर पालिका के मंच में स्थानीय कलाकारों कि जगह नहीं, पलायन के दर्द के बीच ‘कमीशन’ का खेल, बाबा मठारदेव मेले में स्थानीय प्रतिभाओं की उपेक्षा क्यों? – Madhya Pradesh Voice

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नगर पालिका के मंच में स्थानीय कलाकारों कि जगह नहीं, पलायन के दर्द के बीच ‘कमीशन’ का खेल, बाबा मठारदेव मेले में स्थानीय प्रतिभाओं की उपेक्षा क्यों?


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28/11/2025 1:09 AM Total Views: 386595

उजड़ती विद्युत नगरी में लाखों का बजट बाहरी कलाकारों पर न्योछावर, स्थानीय कलाकारों ने खोला मोर्चा, पीआईसी की बैठक और ‘चाय-बिस्कुट’ वाली मंजूरी पर उठे गंभीर सवाल।

बैतूल/सारनी। मध्य प्रदेश की विद्युत नगरी सारणी, जो कभी रोशनी का पर्याय थी, आज अंधेरे भविष्य की ओर देख रही है। बेरोजगारी और पलायन की दोहरी मार झेल रहे इस शहर की विडंबना देखिए कि यहाँ के युवाओं के पास रोजगार नहीं है, लेकिन उत्सवों के नाम पर लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। शहरवासी दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं, युवा दूसरे शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बाबा मठारदेव मेले के भव्य मंच पर बाहरी कलाकारों पर लाखों रुपये लुटाए जा रहे हैं।

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यह केवल बजट का प्रश्न नहीं है, बल्कि आत्मसम्मान का प्रश्न है। स्थानीय कलाकारों का कहना है कि जब शहर आर्थिक तंगी से गुजर रहा है, तो बाहरी चमक-धमक पर जनता का पैसा क्यों बर्बाद किया जा रहा है? जिस बजट में बाहरी कलाकार अपनी जेबें भर कर चले जाते हैं, वह पैसा यदि स्थानीय प्रतिभाओं पर खर्च होता, तो न केवल रोजगार का सृजन होता, बल्कि सारणी की कला संस्कृति भी जीवित रहती।

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प्रतिभा का मोल और बजट का गणित

स्थानीय कलाकारों का दर्द सिर्फ उपेक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके पास तर्क और आंकड़े भी हैं। कलाकारों का स्पष्ट कहना है कि बाहरी कलाकारों से बेहतर मंच प्रतिभा स्थानीय युवाओं में मौजूद है। वे सारणी की मिटटी से जुड़े हैं और यहाँ की नब्ज को पहचानते हैं।

सबसे चौंकाने वाला तथ्य बजट का गणित है। स्थानीय कलाकार संघ का दावा है कि “जितनी भारी-भरकम राशि एक बाहरी कलाकार या ग्रुप को दी जाती है, उतने ही बजट में स्थानीय कलाकारों के तीन बड़े ग्रुप अपनी शानदार प्रस्तुति दे सकते हैं।” बावजूद इसके, आयोजकों को स्थानीय प्रतिभाओं में कोई रुचि नहीं है। नतीजा यह है कि सारणी के कई प्रतिभाशाली कलाकार, जिन्हें अपने ही घर में मंच नहीं मिल रहा, उनकी पहचान अब दब कर रह गई है। नियम यह होना चाहिए कि प्राथमिकता ‘घर के कलाकारों’ को मिले और उसके बाद बाहरी लोगों को, लेकिन यहाँ गंगा उल्टी बह रही है।

‘कमीशन’ का खेल और पीआईसी की बैठक

इस पूरी उपेक्षा के पीछे जो सबसे बड़ा कारण सामने आ रहा है, वह है— भ्रष्टाचार और कमीशन। शहर में दबी जुबान में यह चर्चा आम है कि स्थानीय कलाकारों को मौका इसलिए नहीं दिया जाता क्योंकि उनसे ‘मोटा कमीशन’ नहीं मिलता। बाहरी कलाकारों के लाखों के बिलों में अध्यक्ष और नगर पालिका अधिकारियों के लिए ‘बंदरबांट’ की गुंजाइश ज्यादा होती है।

मेले के आयोजन को लेकर होने वाली पीआईसी (PIC) की बैठकें अब महज एक दिखावा बनकर रह गई हैं। आरोप है कि बैठकों में फैसले पहले से ही ‘फिक्स’ होते हैं। पार्षदों को चाय-नाश्ते पर बुलाया जाता है और औपचारिकता के नाम पर फाइलों पर हस्ताक्षर करवा लिए जाते हैं।

कई पार्षदों ने ऑफ-द-रिकॉर्ड बताया है कि उन्होंने बैठक में स्थानीय कलाकारों की पैरवी की थी, लेकिन उनकी एक न सुनी गई। वहीं, अध्यक्ष का रटा-रटाया जवाब होता है कि “सभी पार्षदों ने बाहरी कलाकारों पर सहमति दी है।” यह विरोधाभास साफ बताता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। अधिकारियों और सत्ताधीशों के लिए मेला आस्था का नहीं, बल्कि ‘कमाई’ का अवसर बन गया है।

ऐसा नहीं है कि सारणी में प्रतिभाओं की कमी है या यहाँ के कलाकारों ने पहले कभी मंच नहीं संभाला। भारतीय कलाकार संघ के जिला अध्यक्ष दिलीप बरसाकर ने आंकड़ों के साथ प्रशासन को आईना दिखाया है। उन्होंने बताया कि, “विगत वर्षों में बाबा मठारदेव मेले में बैतूल जिले के 170 से अधिक कलाकार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। जब पहले स्थानीय कलाकारों से मेला सज सकता था, तो अब उन्हें बाहर का रास्ता क्यों दिखाया जा रहा है?”

स्थानीय कलाकार अब चुप बैठने के मूड में नहीं हैं। उनकी मांग स्पष्ट है—मेले के मंच पर पहला अधिकार सारणी और बैतूल जिले के कलाकारों का है। यदि प्रशासन ने अपनी कमीशन खोरी की नीति नहीं छोड़ी और स्थानीय प्रतिभाओं को वंचित रखा, तो यह न केवल बाबा मठारदेव के भक्तों की भावनाओं का अपमान होगा, बल्कि उस युवा पीढ़ी के साथ धोखा होगा जो अपनी कला के दम पर इस उजड़ते शहर में अपनी पहचान तलाश रही है।

इनका कहना है:—

  • पी आई सी के बैठक में सभी सदस्यों का बाहरी कलाकारों की प्रस्तुति को लेकर समर्थन किया गया। जिसके कारण स्थानीय कलाकारों को आयोजन में शामिल नहीं किया गया। फिर भी स्थानीय कलाकारों द्वारा ज्ञापन सौपने के बाद सभी स्थानीय कलाकारों को 2 दिन में अपने आयोजन प्रस्तुति करने का मौका दिया जा रहा है। इसमें स्थानीय जितने भी ग्रुप है वह अपनी प्रस्तुति दे सकते हैं।

किशोर वर्दे, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद सारनी

 

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