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खाद्य विभाग ने जिसे बताया ‘सुरक्षित’, गैस एजेंसी ने उसी से जताया ‘हादसे’ का डर, मुनाफे के खेल में जनता की जान से खिलवाड़ – Madhya Pradesh Voice

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खाद्य विभाग ने जिसे बताया ‘सुरक्षित’, गैस एजेंसी ने उसी से जताया ‘हादसे’ का डर, मुनाफे के खेल में जनता की जान से खिलवाड़


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05/04/2026 10:14 AM Total Views: 462440

अफसरों की ‘क्लीन चिट’, राहुल गैस एजेंसी की ‘चेतावनी’: कमर्शियल गैस सप्लाई के नाम पर मौत का खुला कारोबार

सारणी। क्षेत्र में गैस सिलेंडरों की सप्लाई को लेकर एक ऐसा चौंकाने वाला और विरोधाभासी मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली की पोल खोल कर रख दी है। मुनाफाखोरी के लालच में आम जनता की जान से कैसे खिलवाड़ किया जा रहा है, इसका यह एक जीता-जागता उदाहरण है। एक तरफ ढाबों और होटलों में अवैध रूप से ‘नैनो कट सिलेंडरों’ (धातु काटने वाले) की सप्लाई की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ इस मामले में प्रशासन और गैस एजेंसी के बयानों में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिल रहा है। प्रशासन इन सिलेंडरों को पूरी तरह सुरक्षित बता रहा है, जबकि सप्लाई करने वाली गैस एजेंसी खुद इसके खतरनाक होने का विज्ञापन छपवा रही है।

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क्या है पूरा मामला?

होटलों, ढाबों और दुकानों में व्यावसायिक उपयोग के लिए 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग अनिवार्य है। लेकिन, बैतूल और सारणी क्षेत्र में एक गैस एजेंसी द्वारा कमर्शियल सिलेंडर की आड़ में “नैनो कट सिलेंडर” खपाए जा रहे हैं। शिकायतें मिलने के बाद जब मामला गरमाया, तो खाद्य विभाग की नींद टूटी। तहसीलदार संतोष पथोरिया, फूड इंस्पेक्टर आशीष कुमरे और पुलिस की संयुक्त टीम ने आनन-फानन में मौके पर पहुंचकर जांच की औपचारिकता पूरी की।

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प्रशासन की लीपापोती: असुरक्षित को बताया ‘मानक’

जांच के बाद जो नतीजा निकलकर सामने आया, उसने सभी को हैरत में डाल दिया। फूड इंस्पेक्टर आशीष कुमरे ने अपने आधिकारिक बयान में “नैनो कट सिलेंडर” को कमर्शियल उपयोग के लिए पूरी तरह मान्य ठहरा दिया। उन्होंने तर्क दिया कि यह इंडियन ऑयल की गाइडलाइन के तहत आता है और सुरक्षित है। प्रशासन के इस रुख ने उन गंभीर सवालों को जन्म दे दिया है कि क्या वास्तव में गैस कंपनियों की ऐसी कोई गाइडलाइन है जो धातु काटने वाले उच्च दबाव के सिलेंडर को ढाबों के चूल्हों पर इस्तेमाल करने की इजाजत देती है, या फिर यह सीधे तौर पर किसी बड़े घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश है?

एजेंसी का यू-टर्न: खुद मान लिया कि है ‘खतरा’

प्रशासनिक टीम द्वारा नैनो कट सिलेंडर को क्लीन चिट (सुरक्षा की मुहर) दिए जाने के ठीक बाद, इस पूरे नाटक में एक नया मोड़ आ गया। लगातार प्रकाशित हो रही खबरों के दबाव में राहुल गैस एजेंसी ने खुद ही एक प्रेस नोट जारी कर दिया। अखबारों में छपे इस प्रेस नोट में एजेंसी ने होटलों और ढाबा संचालकों को स्पष्ट हिदायत दी है कि वे ‘मेंटल कटिंग’ (धातु काटने) वाले 19 किलो के नैनो कट सिलेंडर का उपयोग न करें। एजेंसी ने खुद स्वीकार किया है कि इन सिलेंडरों के उपयोग से गंभीर दुर्घटना हो सकती है और संचालकों को केवल 19 किलो के नियमित कमर्शियल सिलेंडर का ही उपयोग करना चाहिए।

जानकारों की राय: मौत का सामान हैं ये सिलेंडर

तकनीकी जानकारों और विशेषज्ञों के मुताबिक कमर्शियल सिलेंडर का निर्माण होटलों और ढाबों के चूल्हों के दबाव को सहने और पकाने के अनुकूल किया जाता है। नैनो कट सिलेंडर को विशेष रूप से भारी औद्योगिक उपयोग और धातु (Metal) की कटिंग के लिए बनाए जाते हैं। इन नैनो कट सिलेंडरों का गैस प्रेशर सामान्य कमर्शियल सिलेंडरों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। इन्हें होटलों के सामान्य चूल्हों पर इस्तेमाल करना एक टाइम बम को दावत देने जैसा है, जिससे किसी भी वक्त बड़ा विस्फोट और जनहानि हो सकती है।

उठ रहे हैं गंभीर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने सिस्टम पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जब गैस एजेंसी खुद प्रेस नोट जारी कर नैनो कट सिलेंडरों से दुर्घटना होने की आशंका जता रही है, तो प्रशासन के अधिकारी इसे किस नियम के तहत ‘सुरक्षित’ बता रहे हैं?

क्या खाद्य विभाग और गैस एजेंसी के बीच कोई अघोषित साठगांठ है? आम जनता और ढाबा कर्मचारी अपनी सुरक्षा के लिए किस पर भरोसा करें—क्लीन चिट देने वाले अधिकारियों पर, या हादसे की चेतावनी देने वाली एजेंसी पर?

यह मामला अब केवल एक नियम उल्लंघन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सीधे तौर पर जन सुरक्षा से जुड़ा है। क्षेत्र की जनता अब इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग कर रही है, ताकि इस विरोधाभास के पीछे छिपे असली दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।

इनका कहना है –

  • कनिष्ठ आपूर्ति अधिकार टेकाम सर के निर्देश पर में और तहसीलदार संतोष पथोरिया के साथ जांच करने गया था जिसमें पता चला कि नैनो कट सिलेंडर को कमर्शियल उपयोग कर सकते है और यह इंडियन ऑइल की गाइडलाइन में भी है

आशीष कुमरे,खाद्य निरीक्षक बैतूल

  • जांच के लिए आपूर्ति अधिकारी आए थे मुझे साथ रहने को कहा गया था इसलिए में उनके साथ गया था, कौनसी दवा किस काम की है मुझे कैसे पता चलेगा वैसे ही सिलेंडर को जानकारी मुझे नहीं पता में सिर्फ साथ में खड़ा था 

संतोष पथोरिया, नायब तहसीलदार घोड़ाडोंगरी

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