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बैतूल जिला अस्पताल में अमानवीयता: प्रसूता के साथ दुर्व्यवहार और लापरवाही से नवजात की दर्दनाक मौत – Madhya Pradesh Voice

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बैतूल जिला अस्पताल में अमानवीयता: प्रसूता के साथ दुर्व्यवहार और लापरवाही से नवजात की दर्दनाक मौत


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24/02/2026 9:15 PM Total Views: 461333

बैतूल। जिला अस्पताल से एक बेहद संवेदनशील और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल के प्रसूता वार्ड में स्वास्थ्य कर्मियों की कथित घोर लापरवाही और अमानवीय व्यवहार के कारण एक नवजात शिशु की मौत हो गई है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला की मदद करने के बजाय, मेडिकल स्टाफ ने उसके साथ न केवल बदसलूकी की, बल्कि शारीरिक रूप से भी प्रताड़ित किया।

घटना का मुख्य विवरण

शाकादेही निवासी योगेश यादव ने अपनी पत्नी को 20 फरवरी को तेज प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। परिवार के अनुसार, यह घटना उसी रात की है। आरोप है कि रात करीब 2:30 बजे जब प्रसूता दर्द से कराह रही थी, तब ड्यूटी पर तैनात नर्स और अन्य स्टाफ सो रहे थे। जब उन्हें मदद के लिए उठाया गया, तो उन्होंने चिढ़कर बदसलूकी शुरू कर दी। परिजनों का सबसे गंभीर आरोप यह है कि डिलीवरी के दौरान नर्स और स्टाफ ने प्रसूता के पेट पर जोर से दबाव डाला और घूंसे मारे, जिसके परिणामस्वरूप नवजात की जान चली गई। शारीरिक कष्ट के साथ-साथ प्रसूता को मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया गया। स्टाफ ने अत्यंत अभद्र टिप्पणी करते हुए कहा, “तुमने कोई पाप किया होगा, इसलिए बच्चा नहीं हो रहा है।”

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परिवार की मौजूदा स्थिति

इस दर्दनाक घटना के बाद से प्रसूता की शारीरिक और मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। नवजात को खोने का सदमा और अस्पताल के स्टाफ का अमानवीय व्यवहार परिवार के लिए गहरा आघात बन गया है। परिवार जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं से त्रस्त होकर महिला को किसी निजी अस्पताल में ले जाना चाहता था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन के दबाव या आग्रह के कारण फिलहाल उसका इलाज उसी जिला अस्पताल में ही जारी है।

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प्रशासन का रुख और कार्रवाई

नवजात के पिता और पीड़ित परिवार ने इस अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हुए कलेक्ट्रेट में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर मौजूद जिला पंचायत CEO अक्षत जैन ने सिविल सर्जन को तुरंत जांच के सख्त निर्देश दिए हैं। बैतूल जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. जगदीश घोरे ने बताया कि हालांकि परिवार द्वारा दी गई लिखित शिकायत में ‘पेट पर घूंसे मारने’ का स्पष्ट जिक्र नहीं है, लेकिन लापरवाही की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एक जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है। घटना की रात ड्यूटी पर मौजूद नर्स और क्लास IV (चतुर्थ श्रेणी) स्टाफ को कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी किया गया है। इस मामले में अभी तक पुलिस में कोई औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है।

सिविल सर्जन ने पीड़ित परिवार को यह आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट सामने आते ही दोषियों के खिलाफ कड़ी और सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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